Nagpur Builder Flat Dispute: नागपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने अहम फैसले में मनमानी और अनुचित व्यापार प्रथा पर कड़ा प्रहार कर बिल्डर को आदेश दिया है कि वह एक विधवा महिला से बची हुई मामूली रकम लेकर तुरंत फ्लैट की रजिस्ट्री (बिक्री पत्र) उनके नाम करे और फ्लैट का कब्जा सौंपे। यदि ऐसा करने में कोई तकनीकी बाधा आती है तो बिल्डर को 32।50 लाख रुपये 9% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने होंगे।
जयताला रोड निवासी प्रतिमा मेश्राम और उनके बच्चों द्वारा दिघोरी निवासी बिल्डर नरेंद्र आनंदराव झाड़े और उनकी पत्नी स्वाति झाड़े के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।
दरअसल प्रतिमा के पति राजदत्त मेश्राम ने 9 मार्च 2020 को बिल्डर नरेंद्र झाड़े के साथ दिघोरी स्थित 'एआर अपार्टमेंट' (प्लॉट नंबर 53) में पहले माले पर एक फ्लैट खरीदने का करार किया था। पति के निधन के बाद उनकी पत्नी प्रतिमा मेश्राम ने से संपर्क किया और बाकी बची रकम देकर फ्लैट की रजिस्ट्री कराने की पेशकश की। दुर्भाग्यवश 27 जून 2020 को राजदत्त मेश्राम का हार्ट अटैक से निधन हो गया।
बिल्डर ने महिला को बताया कि उसने इस फ्लैट को सिंडिकेट बैंक में गिरवी रखकर 12.50,000 रुपये का कर्ज लिया हुआ है और कोरोना काल के कारण वह किस्ते नहीं भर पाया है। बिल्डर ने कहा कि बैंक से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' मिले बिना यह फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं कर सकता।
इसके बाद 16 दिसंबर 2022 को दोनों पक्षों के बीच एक सामंजस्य करार हुआ जिसमें फ्लैट की कुल कीमत 33,90,000 रुपये तय की गई। इनमें से 20 लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे।
प्रतिमा मेश्राम ने बिल्डर का कर्ज उतारने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा (प्रतापनगर शाखा) के माध्यम से 12,50,000 रुपये का भुगतान किया और बैंक का कर्ज चुकता कर दिया। इस तरह शिकायतकर्ता ने कुल 32,50,000 रुपये का भुगतान बिल्डर को कर दिया था और केवल 1,40,000 रुपये देने बाकी थे।
पैसे भरने के बाद बिल्डर के कहने पर महिला ने फ्लैट पर अपना ताला लगा दिया था लेकिन जब 17 दिसंबर 2020 को महिला बची हुई 1,40,000 रुपये की रकम का चेक लेकर बिल्डर के पास गई तो उसने चेक लेने से इनकार कर दिया। कुछ दिनों बाद जब महिला फ्लैट देखने गई तो उसने पाया कि बिल्डर नरेंद्र झाड़े ने फ्लैट का ताला तोड़ दिया है और वह खुद उस फ्लैट में रह रहा है।