शहर में सीमेंट की सड़कों की खराब स्थिति (सोर्स सोशल मीडिया)
नागपुर

सड़कों की दुर्दशा पर बॉम्बे HC सख्त, PWD-NIT-NMRDA को आखिरी मौका, ठेकेदारों के भुगतान का हिसाब भी मांगा

Nagpur Cement Roads Quality: नागपुर में घटिया सीमेंट सड़कों पर हाई कोर्ट ने PWD, NIT और NMRDA को 4 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया है, जबकि ठेकेदारों के भुगतानों की सूची सीलबंद लिफाफे में जमा कराई गई है।

वेदांत जोशी

Bombay High Court Gave Final Deadline To PWD: शहर में सीमेंट की सड़कों की खराब स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जनमंच की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD), नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) और नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (NMRDA) से सड़क निर्माण में वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने के संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा है।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

सोमवार को न्यायाधीश उर्मिला जोशी-फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने शहर में चल रहे सड़क विकास और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए संबंधित विभागों से यह स्पष्ट करने को कहा कि सड़कों का निर्माण निर्धारित तकनीकी और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया जा रहा है या नहीं।

कोर्ट ने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी है कि सड़क निर्माण और विकास के दौरान विभाग विशेषज्ञों की वैज्ञानिक सहायता ले रहे हैं या नहीं।

विभागों को दिया आखिरी मौका

पिछली सुनवाई में अदालत के आदेश के पैरा 4 के तहत PWD से जानकारी मांगी गई थी। इसमें यह स्पष्ट करना था कि शहर में सड़क निर्माण के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है या नहीं।

सोमवार को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील एस.एम. उके ने इस जानकारी को प्रस्तुत करने के लिए अदालत से दो दिन का अतिरिक्त समय मांगा। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों को ‘एक और आखिरी मौका’ दिया।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर 2026 को दोपहर 2.30 बजे निर्धारित की है। उस दिन PWD, NIT और NMRDA को इस तकनीकी मुद्दे पर अपना जवाब और दलीलें प्रस्तुत करनी होंगी।

ठेकेदारों को किए भुगतान का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में

मामले में एक अहम जानकारी अदालत के सामने रखी गई। पिछली सुनवाई के आदेश के पैरा 8 के अनुसार PWD ने पिछले एक वर्ष में किए गए निर्माण कार्यों और विभिन्न ठेकेदारों को किए गए भुगतानों से संबंधित विस्तृत डेटा हाई कोर्ट में प्रस्तुत किया।

यह वित्तीय रिकॉर्ड सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष दाखिल किया गया। कोर्ट ने इस रिकॉर्ड को अपने दस्तावेजों में शामिल कर लिया है।

अब जवाबदेही तय होने की उम्मीद

सड़क निर्माण पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच हाई कोर्ट की सख्ती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर में सीमेंट सड़कों की गुणवत्ता, निर्माण की तकनीक और ठेकेदारों को किए गए भुगतान को लेकर अदालत में चल रही सुनवाई से अब संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है।

4 सितंबर की सुनवाई में यह साफ होगा कि PWD, NIT और NMRDA सड़क निर्माण में विशेषज्ञों की मदद और वैज्ञानिक पद्धति को लेकर अदालत के सामने क्या जवाब देते हैं।

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