नागपुर हाईकोर्ट, अपर जिलाधिकारी, सुनवाई,(सोर्स: सोशल मीडिया)  
नागपुर

नागपुर HC का बड़ा आदेश: अपर जिलाधिकारी को लंबित मामले में अंतिम फैसला सुनाने से रोका; याचिकाकर्ता को मिली राहत

Nagpur Bombay High Court: सुनवाई की तारीख को लेकर हुई गलतफहमी के कारण अनुपस्थित रहने पर अपील बंद कर दी गई थी। हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगा दी।

अंकिता पटेल

Nagpur High Court Judicial Relief: नागपुर एंटी-करप्शन विभाग की एक कार्रवाई से जुड़ी खबर पढ़ने के बाद गलतफहमी का शिकार होकर सुनवाई में नहीं पहुंचने के कारण अपर जिलाधिकारी ने उनके पास लंबित अपील पर याचिकाकर्ता की दलील सुने बिना फैसले के लिए बंद कर दिया। इसे चुनौती देते हुए नीलकंठ बारापात्रे की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपर जिलाधिकारी को एक लंबित मामले में कोई भी अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया।

याचिकाकर्ता नीलकंठ बारापात्रे की शिकायत पर 5 दिसंबर 2019 को महाराष्ट्र स्लम एरिया एक्ट की धारा 3-2(1) के तहत प्रतिवादी संख्या 7 और 8 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस से असंतुष्ट होकर उन्होंने 16 दिसंबर 2019 को अपर जिलाधिकारी के समक्ष अपील दायर की थी। इस अपील में याचिकाकर्ता ने 25 जून 2021 को हस्तक्षेप के लिए आवेदन दिया जिसे मंजूर कर लिया गया और वे नियमित रूप से मामले की सुनवाई में उपस्थित हो रहे थे।

एंटी करप्शन की खबर से हुई गलतफहमी

मामले में नया मोड़ तब आया जब 15 मई 2026 की सुनवाई में याचिकाकर्ता पेश नहीं हुए। अदालत में याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 26 अप्रैल 2026 को अखबारों में एक खबर छपी थी कि अपर कलेक्टर कार्यालय के संबंधित बेंच क्लर्क को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने गिरफ्तार कर लिया है। इस खबर को पढ़ने के बाद याचिकाकर्ता को लगा कि अपर कलेक्टर कार्यालय में मामलों की सुनवाई नहीं होगी। इसी गलतफहमी के चलते वे 15 मई को पेश नहीं हुए लेकिन अपर कलेक्टर ने उसी दिन मामले की सुनवाई की और याचिकाकर्ता के खिलाफ एकतरफा आदेश पारित करने के लिए मामला बंद कर दिया।

हाई कोर्ट की शरण में पहुंचा याचिकाकर्ता

एकतरफा आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने 22 मई 2026 को अपर कलेक्टर के समक्ष एक आवेदन दायर कर इस आदेश को वापस लेने और अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति मांगी। हालांकि लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी इस आवेदन पर कोई फैसला नहीं हुआ जिससे याचिकाकर्ता को यह आशंका हुई कि कहीं अपर कलेक्टर सीधे अंतिम आदेश न पारित कर दें।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जहां अंतिम आदेश पर रोक लगा दी वहीं सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश भी दिया।

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