अनिल देशमुख-श्यामकुमार बर्वे-चंद्रशेखर बावनकुले-सुनील केदार (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

बावनकुले का ‘चक्रव्यूह’ कामयाब! विपक्ष चारों खाने चित, BJP ने बदल दिया जिले का राजनीतिक नक्शा

Chandrashekhar Bawankule Strategy: नागपुर नगर परिषद चुनाव में BJP की बड़ी जीत, बावनकुले रणनीति से विपक्ष धराशायी, कांग्रेस व राकां को भारी नुकसान। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

प्रिया जैस

Maharashtra Local Body Elections: विधानसभा चुनाव के बाद नगर परिषद व नगर पंचायत चुनाव में बीजेपी को जिले में बड़ी सफलता मिली है। कहा जा रहा है कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के चक्रव्यूह में पूरा विपक्ष फंस गया। बीजेपी ने विविध प्रचार अभियानों के माध्यम से काफी पहले से लोगों तक पहुंचना शुरू कर दिया था।

संगठन में बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। बीजेपी ने मुख्य टारगेट नई नगर परिषद व पंचायतों पर किया था जहां पहली बार चुनाव हुए। वहीं कांग्रेस व राकां के गढ़ पर भी फिल्डिंग लगाई थी। इन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी होने का लाभ भी मिला।

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार किया लेकिन कांग्रेस में पूर्व मंत्री सुनील केदार, सांसद श्यामकुमार बर्वे सहित स्थानीय नेताओं की टीम ने ही कमान संभाली थी।

सांसद बर्वे नहीं बचा पाये घर

केदार को अपने सावनेर विस क्षेत्र में 4 में केवल मोहपा में सफलता मिली। खापा में करारी टक्कर दी लेकिन जीत नहीं मिली। 3 नप में भाजपा जीत गई। वे जादू नहीं दिखा पाए। बताते चलें कि जिला परिषद में उनकी ही टीम की सत्ता थी। इस चुनाव में उन्होंने पूरे जिले में अपनी टीम के साथ काफी मेहनत की थी।

सांसद श्यामकुमार बर्वे तो अपने घर की नगर पंचायत ही नहीं जितवा पाए। उनके मूल गांव कन्हान कांद्री नगर पंचायत में कांग्रेस का उम्मीदवार हार गया और बीजेपी का नगराध्यक्ष सुजीत पानतावने जीत गए। उमरेड में कांग्रेस विधायक ने भी कोई करिश्मा नहीं किया। उमरेड व भिवापुर दोनों ही नगराध्यक्ष भाजपा के चुने गए।

दरअसल यह चुनाव भाजपा ने जहां पूरी शक्ति से लड़ा वहीं कांग्रेस में अफरा-तफरी देखने को मिली। अनेक कार्यकर्ता ऐन चुनाव के समय पार्टी छोड़ गए तो कई जगहों पर योग्य उम्मीदवार नहीं दिया गया। भाजपा ने छोटी-छोटी बैठकों के माध्यम से बस्तियों में ध्यान केन्द्रित किया था लेकिन कांग्रेस ने स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर पल्ला झाड़ लिया था।

शेकाप के साथ गए, बच गए

राकां शरद पवार पार्टी के नेता व पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के विधानसभा क्षेत्र की 4 में से 3 नगराध्यक्ष बीजेपी के चुनकर आए। अगर उन्होंने काटोल में शेकाप के साथ गठबंधन नहीं किया होता तो शायद वह भी हाथ से चली जाती। चर्चा है कि शेकाप के साथ गठबंधन कर बच गए। महायुति में शिंदे सेना ने रामटेक व पारशिवनी में झंडा फहराया है। राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने जीत खींच लाई। बूटीबोरी में गोंगपा के नगराध्यक्ष उम्मीदवार को कांग्रेस के समर्थन का लाभ मिला और वे विजयी हुए।

5 जगहों पर कांग्रेस नगरसेवक अधिक

जिले भर में कांग्रेस के कुल 120 से अधिक नगरसेवक चुनकर आए हैं। ऐसी भी 5 नप-नपं हैं जहां भले ही भाजपा का नगराध्यक्ष चुना गया हो लेकिन नगरसेवकों की संख्या बीजेपी से अधिक है। गोधनी नगर पंचायत में कांग्रेस ने नगराध्यक्ष के लिए रूपाली मनोहर को खड़ा किया जो केवल 212 वोटों से हारीं लेकिन यहां बहुमत कांग्रेस का है।

17 में से 10 नगरसेवक कांग्रेस के चुने गए हैं। पूर्व जिप उपाध्यक्ष कुंदा राऊत ने यहां काफी परिश्रम किया था लेकिन बहुत कम वोटों के अंतर से नगराध्यक्ष पद हाथ से निकल गया। उमरेड नप में भी विजयी भाजपा को 14 सीटों पर जीत मिली है और कांग्रेस के 13 नगरसेवक चुने गए हैं। कामठी में तो बहुमत कांग्रेस का है।

यहां काउंटिंग के 14वें राउंड तक कांग्रेस के नगराध्यक्ष प्रत्याशी आगे चल रहे थे लेकिन अंत में काफी कम अंतर से बीजेपी जीती लेकिन यहां बीजेपी के नगरसेवक सिर्फ 9 हैं तो कांग्रेस के 16 जीते हैं। रामटेक में कांग्रेस के 7 और बीजेपी के 5 नगरसेवक जीते हैं। खापा में बीजेपी के 10 से केवल 1 और 9 नगरसेवक कांग्रेस के जीते हैं।

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