प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर में रिश्वत लेते असिस्टेंट RTO गिरफ्तार, एसीबी की टीम ने दलाल को भी पकड़ा

नागपुर में एसीबी ने एक व्यक्ति की शिकायत पर सहायक आरटीओ और 1 दलाल को 400 रुपये की घूसखोरी करते पकड़ा। वाहनों की ऑनरशिप बदलने की एवज में आरोपियों ने रिश्वत मांगी थी।

आकाश मसने

नागपुर: प्रादेशिक परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार किस कदर फैला है यह बताने की आवश्यकता नहीं है। अपने काम के लिए आरटीओ जाने वाले नागरिक यह अच्छी तरह जानते हैं कि बगैर पैसा दिए या दलाल की मदद लिए कोई काम नहीं होता। उस पर भी ग्रामीण आरटीओ कार्यालय सबसे ज्यादा बदनाम है। अब एसीबी ने एक व्यक्ति की शिकायत पर सहायक आरटीओ और 1 दलाल को 400 रुपये की घूसखोरी करते पकड़ा। वाहनों की ऑनरशिप बदलने की एवज में आरोपियों ने रिश्वत मांगी थी।

पकड़े गए आरोपियों में ग्रामीण आरटीओ कार्यालय के सहायक प्रादेशिक परिवहन अधिकारी अश्फाक मेहमूद अहमद (57) और दलाल सतरंजीपुरा निवासी मिर्जा असराग अकरम बेग (30) का समावेश है। भालदारपुरा निवासी एक ऑटो डीलर ने अपनी बहन और अन्य परिचित 2 लोगों सहित कुल 3 वाहनों की ऑनरशिप बदलने के लिए आरटीओ ग्रामीण कार्यालय में आवेदन दिया था। अश्फाक ने यह काम बिना कोई त्रुटि निकाले फटाफट कर देने की एवज में 400 रुपये की रिश्वत मांगी।

एसीबी काे मिली थी शिकायत

पीड़ित ने एसीबी से मामले की शिकायत की। 3 जनवरी को एसीबी की टीम ने पंच के समक्ष शिकायत के अनुसार वेरिफिकेशन किया, तब भी अश्फाक ने 400 रुपये लेकर काम करने की बात कही और शिकायतकर्ता को सोमवार को मिलने बुलाया। एसीबी की टीम ने शिकायतकर्ता के साथ 2 पंचों को अश्फाक के पास भेजा।

दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

अश्फाक ने दलाल मिर्जा असराग के जरिए रिश्वत के 400 रुपये लिए। असराग को पकड़ने के बाद एसीबी की टीम ने अश्फाक को भी पकड़ लिया। उनसे रिश्वत के 400 रुपये जब्त किए गए। दोनों के खिलाफ कपिलनगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।

एसपी दिगांबर प्रधान और एडिशनल एसपी संजय पुरंदरे के मार्गदर्शन में इंस्पेक्टर उज्वला मडावी, प्रवीण लाकड़े, कांस्टेबल कांचन गुलबासे, सारंग बालपांडे, पंकज अवचट, अमोल मेंघरे, होमेश्वर वाईकर और हर्षलता भरडकर ने कार्रवाई की।

अधिकारियों और दलालों के बीच मतभेद

जानकारी मिली है कि पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण आरटीओ कार्यालय के अधिकारियों और दलालों के बीच मतभेद चल रहे हैं। यहां समय पर सामान्य नागरिकों का काम हो न हो लेकिन दलालों के काम तुरंत हो जाते थे। ड्राइविंग स्कूल के संचालक अपना ठप्पा लगाकर अधिकारियों के पास दस्तावेज भेजते थे और तुरंत ही काम हो जाता था।

इस वजह से दलाल भी सिर चढ़े थे लेकिन पिछले कुछ समय से ग्रामीण आरटीओ के अधिकारी दलालों की कार्यप्रणाली को लेकर नाराज थे। इस वजह से अधिकारी और दलालों के बीच विवाद चल रहा है। काम अटकने से नाराज दलाल अब अधिकारियों पर दबाव डालने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

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