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विप्लव गोपीकिशन बाजोरिया ने अमरावती स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव के परिणाम को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश नंदेश देशपांडे ने निर्वाचित विधायक प्रवीण पोटे को समन जारी कर 27 नवंबर 2026 तक अपना पक्ष रखने को कहा है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव अधिकारी ने विप्लव बाजोरिया का नामांकन पत्र अनुचित तरीके से खारिज किया था।
Amravati Legislative Council Election: अमरावती स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका विप्लव गोपीकिशन बाजोरिया की ओर से हाई कोर्ट में दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश नंदेश देशपांडे ने निर्वाचित विधायक प्रवीण पोटे को समन (नोटिस) जारी किया। हाई कोर्ट ने प्रतिवादी प्रवीण पोटे को 27 नवंबर 2026 तक अपना पक्ष रखने के लिए समन जारी किया है।
विधान परिषद के लिए स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के हुए चुनावों को लेकर 22 जून 2026 को परिणाम घोषित किए गए जिसमें प्रवीण पोटे को विजयी घोषित किया गया। याचिकाकर्ता विप्लव बाजोरिया ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100 (1) (सी) के तहत इस चुनाव को निरस्त घोषित करने की मांग की है।
याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि चुनाव अधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता का नामांकन पत्र अनुचित तरीके से खारिज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे अधि. आरएस सिरपुरकर ने अदालत को बताया कि चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 4-ए के तहत आवश्यक फॉर्म संख्या 26 को भरने और जमा करने में पर्याप्त अनुपालन किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि नामांकन पत्र के साथ याचिकाकर्ता और उनके परिवार की आपराधिक पृष्ठभूमि तथा चल-अचल संपत्ति से संबंधित विवरण विभिन्न संलग्नकों के माध्यम से पूर्ण रूप से प्रस्तुत किए गए थे।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि निर्वाचन आयोग की आधिकारिक हैंडबुक में दिए गए निर्देशों के विपरीत जाकर केवल अत्यधिक तकनीकी (हाइपर टेक्निकल) आधार पर नामांकन पत्र निरस्त किया गया जो नियमसंगत नहीं है। याचिकाकर्ता की इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के चुनाव याचिका नियमों के परिशिष्ट-2 के तहत प्रतिवादी को समन जारी करने का निर्देश दिया।