नागपुर एम्स (साेर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

AIIMS में भर्ती संकट: नागपुर समेत कई केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा सटीक जवाब

AIIMS Recruitment 2026: देश के एम्स संस्थानों में खाली पड़े फैकल्टी पदों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। स्टाफिंग पैटर्न में बदलाव और डॉक्टरों की कमी पर केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा गया है।

आकाश मसने

Bombay High Court On AIIMS Vacancy: देश के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी अब न्यायपालिका की रडार पर है। नागपुर स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने समाचार पत्रों की रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।

याचिका पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की पैरवी कर रहे वकील ने बताया कि हर वर्ष एम्स में नई-नई सुविधाओं को लेकर विस्तार हो रहा है। हर वर्ष कोई नया विभाग और उसके अनुसार बेड की संख्या बढ़ती जा रही है। इनकी आवश्यकता अनुसार डॉक्टर्स और कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए स्टाफिंग पैटर्न भी बदलता जा रहा है। हालांकि इन पदों को भरने की प्रक्रिया तो पूरी की जा रही है किंतु भर्ती प्रक्रिया में कहीं आवश्यकता अनुसार कर्मचारी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं तो कहीं पर योग्यता के अनुसार मिलना मुश्किल हो रहा है।

अदालत मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता जुगलकिशोर गिल्डा द्वारा हलफनामा को लेकर कई आपत्तियां उठाए जाने के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने एम्स में आवश्यक कार्यों के लिए सुझावों की सूची तैयार करने के निर्देश अदालत मित्र को दिए।

जो संभव है उसकी जानकारी प्रेषित करें

हाई कोर्ट ने अदालत मित्र को 2 सप्ताह के भीतर सुझावों की सूची तैयार कर प्रतिवादी पक्ष को भी उपलब्ध करने का आदेश दिया। साथ ही उसके एक सप्ताह बाद केंद्र सरकार को इसका जवाब दायर करने को कहा गया है। कोर्ट ने कहा कि जो सुझाव दिए जाएंगे उनमें से क्या संभव हैं, उसकी सटीक जानकारी दें। यदि किसी सुझाव के लिए कोर्ट के आदेश की आवश्यकता होगी तो कोर्ट द्वारा निश्चित ही आदेश जारी किया जाएगा। हाई कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नागपुर में फैकल्टी मेम्बर्स की भारी कमी और रिक्त पदों पर कड़ा रुख अपनाया था।

373 में से 137 पद खाली

समाचार पत्र में छपी खबर में बताया गया था कि एम्स नागपुर में स्वीकृत 373 पदों में से 137 पद खाली पड़े हैं। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की कमी और इन रिक्तियों के कारण संस्थान की स्वास्थ्य सेवाएं कई स्तरों पर गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं। कोर्ट ने अदालत मित्र अधि। शौनक कोठेकर को नियमानुसार एक औपचारिक याचिका तैयार करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जुगलकिशोर गिल्डा को इस मामले में अदालत मित्र नियुक्त किया गया है।

इस तरह के आंकड़े उजागर

  • एम्स जोधपुर : यहां सबसे अधिक 46.7% (405 में से 189) पद खाली हैं।
  • एम्स गोरखपुर : रिक्तियों का प्रतिशत 45.5% है।
  • एम्स जम्मू : यहां 44.3% पद रिक्त हैं।
  • एम्स कल्याणी और बिलासपुर : इन दोनों संस्थानों में भी 40% से अधिक पद खाली हैं।
  • भठिंडा में 37.4% पद खाली।
  • नागपुर में 36.7% पद खाली।
  • रायपुर में 34.8% पद खाली।
  • भुवनेश्वर में 26% पद खाली।
  • भोपाल में 25.6% पद खाली।

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