Naam Foundation Full Story: जब एक अन्नदाता अपने ही खेतों में बेबस होकर जिंदगी की जंग हार जाता है, तो उसका दर्द सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरे समाज के जमीर पर सवाल होता है। इसी तड़प और आंसुओं के बीच एक ऐसे जन-आंदोलन का जन्म हुआ जिसे आज पूरा देश 'नाम फाउंडेशन' (NAAM Foundation) के नाम से जानता है।हम आज नाम फांउडेशन की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसकी स्थापना करने वाले अभिनेता नाना पाटेकर आज हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार सुबह नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
वर्ष 2015 का वह दौर महाराष्ट्र के लिए बेहद भयावह था। मराठवाड़ा और विदर्भ के गांवों में खेत प्यासे पड़े थे, कुएं सूख चुके थे और हवाओं में छाए सन्नाटे के बीच हर रोज किसी न किसी किसान की आत्महत्या की खबर आती थी।
सरकारी वादों और व्यवस्था की उदासीनता के बीच जब इंसानियत दम तोड़ रही थी, तब बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर और मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे का दिल दहल उठा। वे सिर्फ अपनी फिल्मों या अभिनय तक सीमित नहीं रह सके; उन्होंने फैसला किया कि वे मूकदर्शक बनकर किसानों को मरते हुए नहीं देखेंगे।
नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे ने मिलकर सितंबर 2015 में 'नाम फाउंडेशन' की नींव रखी। शुरुआत में मकसद केवल पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देना था, लेकिन जब वे धरातल पर उतरे, तो उन्हें अहसास हुआ कि समस्या केवल पैसों की नहीं, बल्कि उम्मीद के पूरी तरह टूट जाने की है।
मकरंद अनासपुरे बताते है कि शुरुआत ये नहीं पता था कि करना क्या है। मन में बस एक इच्छा थी कि किसानों की ज्यादा से ज्यादा मदद किस तरह से की जा सकती है और इससे आत्महत्याएं टल सकती है क्या? मन की इसी इच्छा ने नाम फाउंडेशन को जन्म दिया। इसके बाद यह एक जनआंदोलन बन गया।
नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे द्वारा शुरू किया गया नाम फाउंडेशन आज एक बहुआयामी संगठन बन चुका है, जो मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में सक्रिय है।
जल संरक्षण व कृषि विकास: बंद पड़ी नहरों की सफाई, तालाबों का निर्माण और वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण।
विधवा एवं बाल कल्याण: आत्महत्या कर चुके किसानों की पत्नियों को सिलाई मशीन, मवेशी और स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराना तथा बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाना।
सामूहिक विवाह व सामाजिक कल्याण: गरीब किसान परिवारों की बेटियों के सामूहिक विवाह का आयोजन करना ताकि वे कर्ज के जाल में न फंसें।
शिक्षा, स्वास्थ्य व आपदा राहत: ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल कैंप, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और बाढ़ या आपदा के समय राहत सामग्री पहुंचाना।
सैनिक कल्याण: देश की रक्षा में शहीद हुए जवानों के परिवारों को संबल देना।
विजन: किसानों की पीड़ा दूर कर उन्हें स्वाभिमानी बनाना और एक मजबूत, आत्मनिर्भर व प्रगतिशील भारत के निर्माण में योगदान देना।
मिशन: बुनियादी ढांचे, शिक्षा, रोजगार, जल सुरक्षा और भोजन के मुद्दों पर काम करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण और टिकाऊ विकास करना।
संस्था की पारदर्शिता और मजबूत कार्यप्रणाली के पीछे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक निष्ठावान टीम है। अब तक नाना पाटेकर इसके चेयरमैन थे।
मकरंद अनासपुरे (सेक्रेटरी, अभिनेता)
चंद्रशेखर एल.एस. (ट्रेज़रर, चार्टर्ड अकाउंटेंट)
इंद्रजीत देशमुख (ट्रस्टी, समाज कल्याण)
चंद्रशेखर फणसलकर (ट्रस्टी, MD मेडिसिन, कंसल्टेंट फिजिशियन)
उदय निर्गुडकर (ट्रस्टी, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर - NHPC लिमिटेड)
जैकबैस्टियन के. नाज़रेथ (ट्रस्टी, रियल एस्टेट प्रोफेशनल)
नाम फाउंडेशन साबित करता है कि जब इरादे नेक हों और संवेदनाएं सच्ची हों, तो दो लोगों की छोटी-सी कोशिश भी लाखों जिंदगियों को बदलने वाला एक विशाल जन-आंदोलन बन सकती है।