Zeeshan Siddiqui Statement: बांद्रा पूर्व का गरीब नगर इलाका इस समय केवल बुलडोजर की कार्रवाई का ही नहीं, बल्कि महायुति के भीतर सुलगते विरोधाभासों का भी केंद्र बन गया है। एक ही गठबंधन के दो बड़े चेहरों के बीच गरीब नगर को देखने का नजरिया इतना अलग है कि जनता भी हैरान है। जहाँ एक तरफ भाजपा के फायरब्रांड नेता किरीट सोमैया को इस इलाके में बांग्लादेशी घुसपैठिए नजर आते हैं और वे बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर कार्रवाई का जायजा लेते हैं, वहीं दूसरी तरफ महायुति के ही सहयोगी दल के नेता जीशान सिद्दीकी को यहाँ के लोग बेचारे और मासूम दिखाई दे रहे हैं।
इसे महायुति के भीतर समन्वय की कमी कहें या अपनी-अपनी राजनीति चमकाने का एक स्टाइलिश तरीका, फिलहाल बांद्रा की सड़कों पर बयानों की जंग छिड़ी हुई है। इसी बीच, जीशान सिद्दीकी ने एक बार फिर गरीब नगर के निवासियों के पक्ष में मोर्चा खोलते हुए एक बेहद भावुक बयान जारी किया है। अपने इस बयान में उन्होंने न केवल बेघर होते लोगों का दर्द साझा किया, बल्कि विपक्ष (UBT) के नेताओं पर भी तीखे तंज कसते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया है।
जीशान सिद्दीकी ने वीडियो में भावुक होते हुए अपना रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने दहाड़ते हुए कहा, 2019 से 2024 तक मैं विधायक था। उस दौर में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन मैंने कभी किसी गरीब के सिर से छत नहीं छीनी। चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई मेरे कार्यकाल में किसी का घर नहीं टूटा। जीशान ने साफ किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सौंदर्यीकरण के नाम पर मासूम बच्चों और बुजुर्गों को बेघर करना किसी भी लिहाज से न्यायसंगत नहीं है।
सियासी रोमांच तब और बढ़ गया जब जीशान ने बांद्रा पूर्व के वर्तमान विधायक वरुण सरदेसाई (शिवसेना UBT) पर सीधा और व्यक्तिगत हमला बोला। जीशान ने उन्हें पढ़े-लिखे गवार तक कह डाला। विवाद की जड़ 2021 के सर्वे की गलतियां हैं। जीशान का दावा है कि वरुण सरदेसाई जिस सर्वे की गलतियों का हवाला दे रहे हैं, वह दरअसल 2017 में हुआ था। उन्होंने याद दिलाया कि 2021 में जब ये कथित गलतियां हुईं, तब महाराष्ट्र की कमान उद्धव ठाकरे के हाथ में थी और आदित्य ठाकरे पालक मंत्री थे। जीशान ने आरोप लगाया कि वर्तमान नेतृत्व अपनी नाकामी छिपाने के लिए दूसरों पर ठीकरा फोड़ रहा है।
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गरीब नगर की रोती-बिलखती महिलाओं और बेसहारा बच्चों के प्रति सहानुभूति जताते हुए जीशान ने वादा किया है कि वे इस लड़ाई को सड़क से लेकर सरकार और कोर्ट तक ले जाएंगे। उन्होंने पीड़ितों को भरोसा दिलाया है कि वे उन्हें दोबारा घर दिलाने के लिए हर संभव कानूनी मदद करेंगे।
फिलहाल, बांद्रा पूर्व का तापमान सातवें आसमान पर है। एक तरफ प्रशासन का पंजा है, दूसरी तरफ बुलेटप्रूफ जैकेट की सियासत और तीसरी तरफ बेघरों के हक की लड़ाई का दावा करने वाले जीशान सिद्दीकी। देखना यह है कि इस सियासी घमासान में जीत किसकी होती है और गरीब नगर के निवासियों को क्या वाकई न्याय मिल पाएगा?