Western Railway Crowd Control Staff: पश्चिम रेलवे पर रोजाना 30 लाख से अधिक यात्रियों का भार है। इससे पश्चिम रेलवे बेबस नजर आ रही है। इसी वजह बढ़ते भीड़ के स्थाई समाधान के लिए ठेका कर्मियों का सहारा लिया जाएगा। पश्चिम रेलवे द्वारा नियुक्त किए जानेवाले ये कर्मी चर्चगेट से डहाणू रोड के बीच 37 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म, सीढ़ियों, फुटओवर ब्रिज और लोकल के दरवाजों के पास भीड़ नियंत्रित करने के लिए लगाया जाएगा।
बताया गया है कि आरपीएफ और रेलवे पुलिस के 2,559 पद रिक्त होने के बावजूद नियमित भर्ती के बजाय भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी ठेका कर्मचारियों को देने की तैयारी है। दादर, अंधेरी, बोरीवली, बांद्रा, नालासोपारा, वसई रोड, भाईंदर और विरार में भीड़ का दबाव सबसे अधिक है। प्रमुख भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर 20 या उससे अधिक, जबकि अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले स्टेशनों पर करीब 10 कर्मचारी तैनात करने का प्राथमिक नियोजन है।
हालांकि, प्रस्ताव को विभागीय स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन वास्तविक नियुक्ति अभी नहीं हुई है। प्रस्ताव वित्त विभाग के पास है और आवश्यक मानव बल व खर्च का अध्ययन जारी है। इसलिए कुल कितने कर्मचारी और कितनी राशि खर्च होगी, यह अभी तय नहीं है। एसी लोकल के स्वचालित दरवाजों के पास भीड़ के कारण दरवाजे बंद होने में कुछ सेकंड की देरी होती है।
इसका असर अगली सेवाओं पर पड़ सकता है। इसलिए दरवाजे समय पर बंद कराने और लोकल को समय पर रवाना करने के लिए स्वतंत्र कर्मचारी लगाए जाएंगे, ठेका कर्मी लोकल के आगमन प्रस्थान के समय यात्रियों की आवाजाही नियंत्रित करेंगे। पहले उतरने वालों को रास्ता देना, फिर चढ़ने वालों की आवाजाही सुचारू करना और दरवाजों के पास भीड़ रोकना उनकी जिम्मेदारी होगी। जरूरत पड़ने पर सीढ़ियों और फुटओवर ब्रिज की भीड़ संभाली जाएगी। इससे आरपीएफ और जीआरपी पर अतिरिक्त दबाव कुछ कम हो सकता है, लेकिन ठेका कर्मी सुरक्षा बलों का विकल्प नहीं होंगे।
मुंबई में मध्य और पश्चिम रेलवे के आरपीएफ के 7,042 मंजूर पदों में 1,816 यानी 25।8 फीसदी रिक्त हैं। मध्य रेलवे में 5,148 में 1,296 और पश्चिम रेलवे में 1,894 में 520 पद खाली हैं। वहीं मुंबई रेलवे पुलिस में 4,243 में से 743 यानी 17।5 फीसदी पद रिक्त हैं। नई भर्ती पूरी हो चुकी है और कर्मचारियों का नौ महीने का प्रशिक्षण जारी है।
मुंबई की उपनगरीय लोकल से रोजाना करीब 70 लाख यात्री सफर करते हैं। इनमें पश्चिम रेलवे के 30 लाख और मध्य रेलवे के 40 लाख यात्री शामिल हैं।
पश्चिम रेलवे पर प्रतिदिन 1,414 उपनगरीय और 145 एसी लोकल सेवाएं चलती हैं। ऐसे में केवल ठेका मानव बल बढ़ाना अस्थाई उपाय माना जा रहा है। स्टेशन, प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, सीढ़ियों, एस्केलेटर और प्रवेश-निकास मार्गों की क्षमता बढ़ाना ही भीड़ की स्थायी समस्या का समाधान हो सकता है।