Uddhav Thackeray Warning: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम चर्चा का केंद्र बना हुआ है अभिजीत दीपके। ताज्जुब की बात यह है कि इस युवा कार्यकर्ता का नाम किसी और ने नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के नेताओं को आईना दिखाने के लिए लिया है।
हाल ही में मातोश्री में आयोजित ठाणे-कल्याण संभाग की एक संगठनात्मक समीक्षा बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे का गुस्सा अपने ही पदाधिकारियों पर फूट पड़ा। उन्होंने नेताओं को खरी-खोटी सुनाते हुए नसीहत दी कि वे आपसी कलह छोड़कर बड़े राजनीतिक संघर्ष पर ध्यान दें।
अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक हैं और वर्तमान में उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है। वह जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन का नेतृत्व करने, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने और सरकार की नीतियों के खिलाफ बेबाक बोलने के कारण देशभर की सुर्खियों में आए हैं। उद्धव ठाकरे ने उनका उदाहरण देते हुए अपने नेताओं को फटकारा और कहा कि जहां एक ओर अभिजीत जैसा युवा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे रहा है, वहीं उनकी पार्टी के नेता छोटे-छोटे पदों और स्थानीय वर्चस्व के लिए आपस में लड़ रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल्याण लोकसभा क्षेत्र में पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को दरकिनार किए जाने के फैसले से स्थानीय स्तर पर भारी असंतोष है। नए और पुराने नेतृत्व के बीच पदों को लेकर चल रही इस खींचतान की गूँज बैठक में भी सुनाई दी। मिलिंद नार्वेकर, केदार दिघे और विलास पोटनिस जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में पदाधिकारियों के बीच हुई शाब्दिक झड़प को देखकर उद्धव ठाकरे ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नेताओं को छोटे पदों के लिए संघर्ष करने के बजाय व्यापक राजनीतिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
इस घटनाक्रम के बीच एक बड़ी जानकारी यह भी सामने आई है कि उद्धव ठाकरे ने अभिजीत दीपके से फोन पर व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया है। शिवसेना नेता चंद्रकांत खैरे के माध्यम से हुई इस बातचीत में ठाकरे ने दीपके के साहस की सराहना की और उन्हें मुंबई स्थित अपने निवास मातोश्री आने का निमंत्रण भी दिया है।
ठाणे जिले में शिवसेना यूबीटी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इस बैठक के बाद यह चर्चा तेज है कि जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और अंदरूनी गुटबाजी को रोकने के लिए आने वाले दिनों में नेतृत्व कुछ कठोर अनुशासनात्मक कदम उठा सकता है। उद्धव ठाकरे का यह कड़ा रुख साफ संदेश देता है कि आगामी बड़ी राजनीतिक लड़ाई के लिए पार्टी में एकता और संघर्ष की भावना होना अनिवार्य है, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ की लड़ाई।