उद्धव ठाकरे व राज ठाकरे 
मुंबई

बीएमसी में फिर आमने-सामने ठाकरे बंधु? नगरसेवक बंटवारे पर यूबीटी-मनसे में तकरार

BMC Elections 2026 में साथ आए उद्धव और राज ठाकरे के बीच अब नगरसेवकों के बंटवारे को लेकर टकराव सामने आया है। मनसे की नाराजगी के बाद उद्धव ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश तेज कर दी है।

अपूर्वा नायक

Uddhav Raj Thackeray BMC Dispute: करीब 20 साल तक चले मनमुटाव के बाद यूबीटी चीफ उद्धव ठाकरे व मनसे प्रमुख राज ठाकरे बीएमसी चुनाव लड़ने के लिए एक साथ आए, लेकिन दोनों भाई मिल कर भी बीजेपी शिंदे सेना को हरा नहीं सके। वहीं अब ऐसी रिपोर्ट है कि दोनों भाइयों में टकराव देखने को मिल रहा है।

इस टकराव की शुरुआत बीएमसी के स्वीकृत नगरसेवकों के बंटवारे को लेकर शुरू हुई। संख्या बल के हिसाब से यूबीटी तीन स्वीकृत नगरसेवकों को नामांकित कर सकती थी। लेकिन इसमें एक सीट मनसे अपने नेता के लिए मांगी तो उद्धव की पार्टी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इससे राज ठाकरे की मनसे नाराज हो गई और उन्होंने वार्ड कमिटी अध्यक्ष पद के चुनाव से दूर रहने का फ़ैसला किया। इस वजह से उद्धव पर प्रेशर बढ़ गया।

उद्धव ने की डैमेज कंट्रोल की कोशिश

बुधवार को बीएमसी के 17 वार्ड कमेटी प्रेसिडेंट चुनाव के लिए नामांकन करने का आखिरी दिन था। ऐसे में मनसे की नाराजगी को दूर करने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने विशेष दूत संजय राऊत को राज से मिलने के लिए भेजा। इन दोनों नेताओं के बीच करीब 25 मिनट चर्चा चली। मिली जानकारी के मुताबिक यूबीटी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए मनसे को अब ज्यादा प्रभाग देने का प्रस्ताव दिया है। इसके बाद दोनों दलों के बीच सुलह के आसार हैं।

शिंदे के साथ राज की मुलाकात से बढ़ीं दूरियां

ठाकरे बंधुओं के बीच विवाद की बड़ी वजह डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को माना जा रहा है। हाल ही में मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने शिंदे से उनके निवास स्थान पर मुलाकात की थी। यह मुलाक़ात उद्धव ठाकरे को रास नहीं आई थी।

उन्हें लग रहा था कि जिस शख्स ने उनसे सीएम की कुर्सी छीनने के अलावा पार्टी को तोड़ दिया। ऐसे नेता से राज को नहीं मिलना चाहिए, हालांकि राज ने कहा कि हर मुलाक़ात को राजनीति के चश्मे से देखना सही नहीं है।

सरदेसाई व देशपांडे के बीच भी मंथन

  • ठाकरे गुट के विधायक वरुण सरदेसाई भी बुधवार को मनसे ऑफिस पहुंचे और वहां संदीप देशपांडे और बीएमसी में पार्टी के ग्रुप लीडर यशवंत किल्लेदार से मुलाक़ात की।
  • मीटिंग के बाद सरदेसाई ने मीडिया से हुई बातचीत में बताया कि चुनाव के बाद वार्ड समितियां बांटी जाती हैं।
  • इसके लिए फ्रेंडली पार्टियों से बातचीत और मीटिंग करनी पड़ती है।
  • जिस तरह राज्यसभा चुनाव के लिए राकां नेता जयंत पाटिल और सांसद सुप्रिया सुले मातोश्री आए थे।
  • इसी तरह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल विधानसभा आए थे।
  • राजनीति में बातचीत करने की जरूरत होती है। इसी तरह मैंने भी बीएमसी प्रभाग कमेटी चुनाव को लेकर मनसे के नेताओं से मुलाकात की है।इसे अलग नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है।

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