सुप्रिया सुले और विजय वडेट्टीवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई

OBC सर्टिफिकेट विवाद पर आमने-सामने आए सुप्रिया सुले और विजय वडेट्टीवार, MVA की अंदरूनी कलह से बढ़ीं मुश्किलें?

MVA Internal Rift Maharashtra Politics: ओबीसी सर्टिफिकेट विवाद को लेकर सुप्रिया सुले और विजय वडेट्टीवार के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बयानबाजी ने MVA की अंदरूनी कलह और मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

गोरक्ष पोफली

Supriya Sule Vijay Wadettiwar OBC Certificate Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। ओबीसी प्रमाणपत्र विवाद को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व विधानसभा के पूर्व विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार के बीच सीधा टकराव देखने को मिला है।

हालांकि वडेट्टीवार ने अब अपने बयान पर खेद व्यक्त कर दिया है, लेकिन इस घटना ने आघाडी के भीतर के गहरे मतभेदों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

क्या था पूरा विवाद?

दरअसल, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा कर दिया था कि भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल सहित कई बड़े मराठा नेताओं के पास ओबीसी प्रमाणपत्र हैं, और इसी के साथ सुप्रिया सुले ने भी ओबीसी प्रमाणपत्र बनवाकर अपने पास रख लिया है। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें शरद पवार के पास ओबीसी प्रमाणपत्र होने या न होने की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।

सुप्रिया सुले का कड़ा रुख

वडेट्टीवार के इस बयान के बाद सुप्रिया सुले बेहद आक्रामक हो गईं। उन्होंने इस दावे को सरासर झूठ करार देते हुए साफ किया कि उनके पास कोई ओबीसी प्रमाणपत्र नहीं है। सुले ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट लिखकर वडेट्टीवार को खुली चुनौती दी कि वे या तो इस संदर्भ में सार्वजनिक रूप से पुख्ता सबूत पेश करें, अन्यथा अपने इस निराधार आरोप के लिए बिना शर्त माफी मांगें।

सुप्रिया सुले ने तीखे लहजे में यह भी सवाल उठाया कि, आखिर महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता रोज उठकर हमें ही निशाना क्यों बना रहे हैं? हमारे 8 सांसद उनके साथ हैं और हम पिछले 12 वर्षों से कांग्रेस के साथ गठबंधन में मजबूती से खड़े हैं। जब भी कांग्रेस पर कोई बाहर से हमला होता है, तो हम हमेशा उसका प्रत्युत्तर देते हैं।

सुप्रिया सुले के इस रुख के बाद शरद पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे भी मैदान में उतर आए। उन्होंने इस मामले पर आक्रामक रुख अपनाते हुए मांग की कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को ऐसे विवादित बयान देने वाले नेताओं को कड़ी समझ देनी चाहिए।

वडेट्टीवार ने जताया खेद, पर क्या सुप्रिया सुले भूल पाएंगी?

मामले को लगातार तूल पकड़ता देख आखिरकार विजय वडेट्टीवार बैकफुट पर आ गए और उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर अपनी सफाई दी। वडेट्टीवार ने स्पष्ट किया कि ओबीसी प्रमाणपत्र को लेकर अपनी भूमिका रखते समय अनजाने में उनके मुंह से सुप्रिया सुले का नाम निकल गया था। उनका सुले पर किसी भी तरह का आरोप लगाने का कोई इरादा नहीं था, और वे इस अनजाने में हुई भूल के लिए खेद व्यक्त करते हैं।

वडेट्टीवार ने दी सफाई

हालांकि, वडेट्टीवार ने यह भी साफ कर दिया कि भले ही सुप्रिया सुले का नाम गलती से लिया गया हो, लेकिन ओबीसी सर्टिफिकेट का गैर-जरूरी लाभ उठाने वाले अन्य मराठा नेताओं के खिलाफ उनकी भूमिका जरा भी नहीं बदली है।

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि एक तरफ ओबीसी प्रमाणपत्र लेकर सत्ता का लाभ उठाना और दूसरी तरफ ओबीसी समाज के अधिकारों पर आघात कर उनकी पीठ में खंजर घोंपना, इस दोहरी भूमिका का वे कभी समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि ओबीसी समाज के न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए है।

अब राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सुप्रिया सुले अपने ही सहयोगी दल के नेता द्वारा लगाए गए इस अपमानजनक आरोप को इतनी आसानी से भूल पाएंगी? चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर का यह अविश्वास महाविकास आघाडी की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है।

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