

Supriya Sule And Rohit Pawar On Amravati Hospital Fire: महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भीषण आग लगने से तीन नवजात बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, NICU वार्ड में रखे वेंटिलेटर में अचानक हुए विस्फोट के कारण यह आग लगी, जिसने देखते ही देखते गंभीर रूप धारण कर लिया। हादसे में कुछ अन्य नवजात शिशुओं की हालत भी गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है।
विपक्ष ने कहा कि अमरावती अस्पताल अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था में लापरवाही का नमूना है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि अमरावती जिला महिला अस्पताल में एनआईसीयू विभाग में वेंटिलेटर में विस्फोट के कारण लगी आग में 3 नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य गंभीर हैं। यह बेहद हृदयविदारक घटना है।
सुप्रिया सुले ने आगे लिखा कि माता-पिता अपने बच्चे का बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन उसी बच्चे को इस तरह खोना पड़े तो उन पर क्या बीत रही होगी, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था में लापरवाही का नमूना है।
शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने मामले की गहन जांच और दोषी व्यक्तियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों का फायर ऑडिट और चिकित्सा उपकरणों का सेफ्टी ऑडिट करने की भी जरूरत है।
सुप्रिया सुले ने इस घटना में अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि मृतकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। घायल शिशु जल्द से जल्द ठीक होकर अपनी मां की गोद में लौटें, ईश्वर से यही प्रार्थना है।
अमरावती अस्पताल अग्निकांड पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) विधायक रोहित पवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं, तो गरीब लोग ही अपनी जान गंवाते हैं। हमें लगता है कि यह सरकार गरीबों की जान की कोई परवाह नहीं करती।
रोहित पवार ने आंकड़े बताते हुई कहा कि पिछले तीन सालों में आदिवासी बच्चों के स्कूलों और हॉस्टलों में कुपोषण, गंभीर बीमारियों, दुर्घटनाओं और सांप के काटने जैसी अलग-अलग वजहों से करीब 44,000 बच्चों की मौत हुई है। इस मामले पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
शरद पवार गुट के विधायक ने कहा कि वर्तमान सरकार में अमीरों की कीमत है। बड़ी-बड़ी कंपनियों के मालिकों को तवज्जो दी जाती है, लेकिन गरीबों की कीमत इस सरकार में नहीं है।
अस्पतालों की सुरक्षा ऑडिट में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए रोहित पवार ने याद दिलाया कि 2021 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी, जिसके बाद एक विशेष समिति बनाई गई थी। उसे महाराष्ट्र भर के अस्पतालों का ऑडिट करने और जरूरी उपायों की सिफारिश करने का काम सौंपा गया था। समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, लेकिन दुख की बात है कि हमें पता चला है कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
रोहित पवार ने कहा कि राज्य की महायुति सरकार को उस रिपोर्ट के आधार पर छह महीने का एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए और लोगों को बताना चाहिए कि महाराष्ट्र के हर तालुका के हर सरकारी अस्पताल में कौन से उपाय लागू किए जाएंगे।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता यशोमती चंद्रकांत ठाकुर ने अमरावती अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा कि यहां पर फायर ब्रिगेड नहीं थी। यह सत्तापक्ष की जिम्मेदारी बनती है। अक्सर लोगों के फोन आते हैं कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं। कई बार हमें खुद अस्पताल आना पड़ता है और डॉक्टरों से बोलना पड़ता है।
यशोमती चंद्रकांत ठाकुर ने कहा कि एक महिला कुछ दिन पहले आई थी। उसे अटेंड नहीं किया गया था और इस कारण उसका बच्चा पेट में ही मर गया था।