शिवसेना यूबीटी नेता आनंद दुबे व बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

हमारे पास शमी-सिराज और सरफराज तो रहमान की क्या जरूरत? मुस्तफिजुर विवाद पर बोले आनंद दुबे

Mustafizur Rahman Controversy: बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान की KKR से रिहाई पर शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने विदेशी खिलाड़ियों के बहिष्कार की मांग दोहराई।

आकाश मसने

Anand Dubey Statement On Mustafizur Rahman: बीसीसीआई के निर्देश पर बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को केकेआर से रिलीज किए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने इस फैसले का स्वागत करते हुए देश की भावनाओं और आस्था का हवाला दिया है।

भारतीय क्रिकेट से जुड़े एक फैसले ने अब सियासत का रंग ले लिया है। बीसीसीआई के निर्देश पर बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स से रिलीज किए जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे का बयान चर्चा में है। उन्होंने इसे “देर से लिया गया लेकिन सही फैसला” बताया है।

‘हमारे पास शमी-सिराज हैं, फिर रहमान क्यों?’

आनंद दुबे ने कहा कि जब भारत के पास सरफराज खान, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे धुरंधर खिलाड़ी मौजूद हैं, तो बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान की कोई जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, भारतीय क्रिकेट आत्मनिर्भर है और विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भरता दिखाना देश की भावना के खिलाफ है।

बीसीसीआई सचिव को धन्यवाद, फैसले का स्वागत

दुबे ने कहा कि वह बीसीसीआई सचिव को धन्यवाद देना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना शुरू से ही बांग्लादेशी और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के भारत में खेलने का विरोध करती रही है। उनके अनुसार, यह विरोध सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि जनता की भावना और करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा मामला है।

‘देश की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए’

शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे  ने कहा कि उनका दल सिर्फ इतना चाहता है कि देश की भावनाओं का सम्मान किया जाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भविष्य में भी बांग्लादेशी और पाकिस्तानी क्रिकेटरों का पूरी तरह से बहिष्कार किया जाना चाहिए और भारत को इन देशों के साथ किसी भी तरह के संबंध नहीं रखने चाहिए।

अजीत पवार के बयान पर तीखा हमला

आनंद दुबे ने डिप्टी सीएम अजीत पवार को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले भाजपा अजीत पवार पर 70 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाती है और फिर उन्हें पार्टी में शामिल कर “क्लीन चिट” दे देती है। दुबे ने तंज कसते हुए कहा कि जब खुद अजीत पवार कहते हैं कि उनका कुछ नहीं हुआ, तो उनके साथियों का क्या होगा?

यह नई डेमोक्रेसी है पर सवाल

दुबे ने आरोप लगाया कि अपराधियों और भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे लोगों को पार्टियों में शामिल कर मंत्री, विधायक और सांसद बना दिया जाता है। जब जनता इसका विरोध करती है, तो कहा जाता है कि यह नई डेमोक्रेसी है और लोग कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने इसे लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ बताया।

मोहन भागवत पर सम्मान, लेकिन सवाल भी

संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि वह उनका बेहद सम्मान करते हैं और उनके विचारों को स्वीकार किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा पर मोहन भागवत का प्रभाव और नियंत्रण कमजोर क्यों दिखाई देता है।

‘चुनाव में समर्थन, बाद में अनदेखी’

दुबे के मुताबिक, चुनाव के समय भाजपा नेता मोहन भागवत का समर्थन मांगते हैं, लेकिन बाद में उनकी सलाह को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख को कभी-कभी भाजपा को स्पष्ट दिशा और मार्गदर्शन देना चाहिए।

राहुल गांधी के विदेश दौरे पर टिप्पणी

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर दुबे ने कहा कि भाजपा उनकी निजी जिंदगी पर जरूरत से ज्यादा नजर रखती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उन्हें विदेश जाने या कार्यक्रमों में शामिल होने का पूरा अधिकार है।

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