अभिजीत दीपके (सोर्स: डिजाइन फोटो)
मुंबई

शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन पर घमासान! अभिजीत दीपके, सौरव दास और आयोजकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज

Shivaji Park Police Complaint: मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया है। अभिजीत दीपके, सौरव दास समेत अन्य के खिलाफ शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई है।

गोरक्ष पोफली

Police Complaint On Abhijeet Dipke Saurav Dass: मुंबई का प्रतिष्ठित शिवाजी पार्क मैदान एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। CJP के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद आयोजकों के खिलाफ शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।

यह शिकायत अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका, रत्ना सिंह और अजिंक्य शिंदे के विरुद्ध दर्ज की गई है। आरोप है कि पुलिस प्रशासन द्वारा अनुमति देने से साफ इनकार करने के बावजूद, कानून और अदालती आदेशों की अनदेखी करते हुए भारी भीड़ जुटाने और प्रदर्शन करने का प्रयास किया गया।

किसने दर्ज कराई शिकायत और क्या है कानूनी आधार?

यह शिकायत शिवाजी पार्क की स्थानीय निवासी और अधिवक्ता सिद्धि देवलेकर द्वारा वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के समक्ष प्रस्तुत की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मुंबई पुलिस ने 27 सितंबर 2026 को आधिकारिक पत्र जारी कर इस प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था।

पुलिस का यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट की जनहित याचिका में दिए गए आदेशों तथा महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी के दिशानिर्देशों पर आधारित था। इसके बावजूद, आयोजकों ने सार्वजनिक शांति भंग होने, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में बाधा और आम नागरिकों को होने वाली असुविधा की अनदेखी करते हुए तैयारियां जारी रखीं।

संविधान और कानून का सीधा उल्लंघन

शिकायत दर्ज कराने के बाद अधिवक्ता सिद्धि देवलेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आयोजकों की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए और इसे सीधे तौर पर संविधान व कानून का उल्लंघन बताया।

आयोजकों के रवैये पर तीखा प्रहार

सिद्धि देवलेकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो लोग संविधान की लड़ाई लड़ने का दावा करते हैं, वे उसी संविधान के तहत स्थापित उच्च न्यायालय के प्राधिकार को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। आप संवैधानिक दायित्वों और अदालती निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर संवैधानिक अधिकारों की मांग नहीं कर सकते।

यदि ऐसे आचरण को बढ़ावा मिला, तो कल कोई भी अदालत के प्रतिबंधों को तोड़ेगा, उसे 'शांतिपूर्ण गतिविधि' कहेगा और कानून से ढील की उम्मीद करेगा। कोई भी विचारधारा, कोई भी राजनीतिक अभियान और कोई भी व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं है। यह प्रदर्शन बॉम्बे हाईकोर्ट का सीधा अपमान है।

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