Shiv Sena Foundation Day Operation Tiger: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ठीक वैसा ही माहौल, वैसी ही सुगबुगाहट और वैसी ही अंदरूनी बेचैनी तैरने लगी है, जिसने साल 2022 में महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार को तख्तापलट कर उखाड़ फेंका था। इस बार चर्चा के केंद्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लोकसभा सांसद हैं। राजनीतिक गलियारों में यह कयासबाजी बेहद तेज हो गई है कि 19 जून को होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के ऐतिहासिक मौके पर उद्धव ठाकरे को अब तक का सबसे बड़ा झटका लग सकता है।
दावा किया जा रहा है कि दिल्ली का भाजपा शीर्ष नेतृत्व सीधे उद्धव गुट के सांसदों के संपर्क में है और महिला आरक्षण व परिसीमन जैसे आगामी बड़े संवैधानिक फैसलों के लिए एनडीए इन सांसदों को अपने पाले में लाने या बाहर से समर्थन जुटाने की जोरदार तैयारी में जुटा है।
कैमरे के सामने लगातार "ऑल इज़ वेल" का दावा करने वाले शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने खुद अनजाने में इस डर को हवा दे दी है। सोमवार रात उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद चौंकाने वाली पोस्ट लिखी। उन्होंने त्रिपुरा की एक छोटी सी पार्टी के नेता शिव कुंडू का जिक्र करते हुए लिखा कि टीएमसी के 22 बागी सांसदों ने दलबदल कानून से बचने के लिए उनकी पार्टी में आधिकारिक विलय कर लिया।
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राउत ने आगे लिखा कि महाराष्ट्र के दल-बदलुओं को भी खुद को बचाने के लिए किसी "कुंडू" को ढूंढना पड़ेगा। इस पोस्ट से साफ हिंट मिला कि उद्धव गुट के बागी सांसदों को अयोग्यता से बचाने के लिए टीएमसी वाली पटकथा पर ही किसी छोटी पार्टी में विलय की गुप्त खिचड़ी पक रही है। इसके साथ ही एनडीटीवी से खास बातचीत में जब राउत से पूछा गया कि सांसदों ने वफादारी की कसमें खाई हैं, तो उन्होंने तंजिया लहजे में कहा, "लोग कसम तो खाते रहते हैं, कसम तो पहले वालों ने भी खाई थी।"
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मातोश्री में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई आपात बैठक में 9 में से केवल 4 सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई, संजय दीना पाटिल और राजाभाऊ वाजे) ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे। गायब रहने वाले 5 सांसदों (संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबाळकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल आष्टीकर) के बारे में दावा किया गया कि वे ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन सूत्रों के अनुसार उद्धव केवल आष्टीकर से ही बात कर पाए थे। ये वही पांच सांसद हैं जो इसके ठीक एक दिन पहले आदित्य ठाकरे के जन्मदिन पर भी नदारद रहे थे। इस आग में घी डालने का काम नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे के ताजा बयान ने किया, जिन्होंने साफ कह दिया कि 19 जून को मुंबई के षण्मुखानंद हॉल में होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम में वे शामिल हो पाएंगे या नहीं, यह अभी तय नहीं है क्योंकि वे दिल्ली से लौट रहे हैं और उनके क्षेत्र में भी कार्यक्रम हैं।
मातोश्री की बैठक से गायब रहने के ठीक दूसरे दिन यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख सीधे दिल्ली में शिंदे गुट के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मिलने पहुंच गए। हालांकि अनिल देसाई ने डैमेज कंट्रोल करते हुए सफाई दी कि संजय देशमुख के घर बेटी को देखने के लिए मेहमान आने वाले थे और यह मुलाकात केवल एक शिक्षण संस्थान के निजी काम के सिलसिले में थी। दूसरी तरफ, नागपुर से महायुति के विधायक और शिंदे गुट के मंत्री आशीष जायसवाल ने "ऑपरेशन टाइगर" पर चुटकी लेते हुए कहा कि यह पूरी तरह से यूबीटी का अंदरूनी मामला है और अगर उनके लोग नाराज होकर जा रहे हैं तो इसमें वे कुछ नहीं कर रहे, क्योंकि वैसे भी बगावत पहले से बताकर नहीं की जाती। बहरहाल, 19 जून के शक्ति प्रदर्शन से पहले कसमों और मुलाकातों के इस खेल ने उद्धव ठाकरे की चिंताएं चरम पर पहुंचा दी हैं।