सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपियों की जमानत खारिज की।
आरोपी साढ़े 13 साल से जेल में बंद हैं।
2013 में वाशी में बिल्डर लोहारिया की हत्या हुई थी।
Sunil Kumar Loharia Murder Case: माफिया शैली में हुए बहुचर्चित सुनील कुमार लोहारिया हत्याकांड के मुख्य आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। अदालत ने लगभग साढ़े तेरह साल से जेल में बंद मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका सिरे से खारिज कर दी है।
आरोपियों ने अदालत में लंबी कैद और समानता (पैरिटी) का हवाला देकर राहत मांगी थी, लेकिन मुंबई क्राइम ब्रांच और पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकीलों के कड़े विरोध के बाद सर्वोच्च अदालत ने कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। इस कानूनी लड़ाई के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।
प्रधान न्यायाधीश ने फैसला सुनाया है कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई वही जज जारी रखेंगे, जिनके पास यह केस पहले से चल रहा था। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान संबंधित जज ने खुली अदालत में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए खुलासा किया था कि मुख्य आरोपी सुरेश बिजलानी ने उनसे संपर्क साधने का प्रयास किया था। सुप्रीम कोर्ट जज ने साफ शब्दों में कहा था कि अदालत और न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आरोपी को चेताया था कि वह खुद को खुशकिस्मत समझे कि उसकी जमानत तत्काल प्रभाव से रद्द नहीं की गई। प्रधान न्यायाधीश के इस फैसले पर सुनील लोहारिया के बेटे संदिप लोहारिया ने संतोष जाहिर करते हुए कहा कि यह फैसला साबित करता है कि देश के न्यायिक अधिकारी किसी भी आरोपी या बाहुबली के दबाव में काम नहीं करते।
16 फरवरी 2013 को नवी मुंबई के वाशी इलाके में बिल्डर सुनील कुमार लोहारिया की दिनदहाड़े गोली मारकर और चापड़ से वार करके निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात से पूरी मुंबई शहर और नवी मुंबई में सनसनी फैल गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार बिल्डर सुरेश बिजलानी और अनुराग गर्ग इस हत्याकांड के मुख्य मास्टरमाइंड है। हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए पूर्व पुलिस अधिकारी इमैनुएल अमोलिक को सुपारी दी गई थी।