टीएमसी में टूट पर संजय राउत का एकनाथ शिंदे पर तंज (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

'बंगाल में एकनाथ शिंदे नहीं थे वरना छीन लेते टीएमसी का सिंबल'; तृणमूल में बड़ी टूट पर संजय राउत का तंज

Sanjay Raut Slam Eknath On TMC Split: पश्चिम बंगाल में टीएमसी के सांसदों की बगावत और एनसीपीआई में विलय पर संजय राउत का एकनाथ शिंदे और भाजपा पर तीखा हमला।

अनिल सिंह

Sanjay Raut Slams Eknath Shinde Over TMC Split NCPI Merger: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद वहां की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची ऐतिहासिक भगदड़ ने देश की राजनीति को गरमा दिया है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर हुई एक गुप्त बैठक के बाद टीएमसी के बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में अपना विलय कर एनडीए सरकार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर महाराष्ट्र से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट पर अब तक का सबसे तीखा और अनोखा हमला बोला है। संजय राउत ने पश्चिम बंगाल के इस दलबदल की तुलना महाराष्ट्र के पुराने घटनाक्रम से करते हुए दोनों राज्यों में हुए अलग-अलग फैसलों पर सवाल उठाए हैं।

कम वोट वाली पार्टी में धकेला, गुलामों की तरह किया बर्ताव

संजय राउत ने दिल्ली से संचालित हो रही इस नई पार्टी 'एनसीपीआई' के वजूद पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस पार्टी का नाम आज तक किसी ने नहीं सुना था और यह मूल रूप से त्रिपुरा की एक छोटी सी इकाई है, जिसे पूरे राज्य में महज 862 वोट मिले थे। राउत ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह कहीं से भी ऐसी गुमनाम पार्टियां ढूंढकर लाते हैं और बागी नेताओं को उसमें इस तरह धकेल देते हैं जैसे किसी गुलाम को जंजीरों में जकड़कर जेल या कुएं में डाल दिया जाता है। उन्होंने तंज कसा कि टीएमसी के 22 सांसद भाजपा में शामिल होने वाले थे, लेकिन कानूनी पेंच के कारण उन्हें जबरन इस गुमनाम दल में समाहित होना पड़ा।

पश्चिम बंगाल में एकनाथ शिंदे जैसा कोई धनवान नेता नहीं था

संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र में संख्या बल बहुत कम होने के बावजूद शिंदे गुट खुद को असली शिवसेना के रूप में पेश करने में सफल रहा। इसके पीछे का कारण बताते हुए राउत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में महाराष्ट्र की तरह कोई एकनाथ शिंदे जैसा नेता नहीं था और न ही वहां कोई समृद्धि महामार्ग जैसी परियोजना चल रही थी, जिसके पैसे को दिल्ली, न्यायपालिका या चुनाव आयोग तक पहुंचाया जा सके। राउत के अनुसार, यदि बंगाल के बागी नेताओं के पास भी महाराष्ट्र जितना अकूत धन होता और वे उसका सही इस्तेमाल करते, तो आज वे पूरी तृणमूल पार्टी और ममता बनर्जी का चुनाव चिन्ह भी छीन चुके होते।

दलबदल के लिए केवल विलय ही एकमात्र संवैधानिक विकल्प

संजय राउत ने देश के दलबदल विरोधी कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में जो हुआ, वही असल में देश का असली कानून है। वहां सांसदों ने दूसरी पार्टी में विलय किया, जिसके बाद मूल तृणमूल कांग्रेस पर उनका दावा पूरी तरह खत्म हो गया। राउत ने महाराष्ट्र के संदर्भ में बोलते हुए कहा कि यहां पूरी तरह से अवैध और अलग तरीके का न्याय किया गया है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस में 60 से अधिक विधायक और 20 से अधिक सांसद पाला बदल चुके हैं, जो कि शिवसेना में हुई टूट से कहीं ज्यादा बड़ी संख्या है। इसके बावजूद अपने संसदीय पद को सुरक्षित रखने के लिए अंततः उन्हें एक दूसरी पार्टी में खुद को विलीन करना ही पड़ा।

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