मुंबई: पश्चिम रेलवे के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने यात्रियों के सामान की चोरी का पता लगाने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए है। साथ ही महिला सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण कदम उठाए है।
मिली जानकारी के अनुसार, आरपीएफ ने यात्रियों को उनके खोए हुए सामान को खोजने में मदद करने, यात्रियों की जान बचाने, दलालों से बचने, बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई करने, अपराधियों को सलाखों के पीछे डालने आदि के लिए जनवरी से सितंबर 2024 तक कई विशेष अभियान और ऑपरेशन किए हैं।
सितंबर 2024 तक, आरपीएफ और जीआरपी द्वारा यात्री सामान की चोरी के 6200 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और 1300 से अधिक व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
पश्चिम रेलवे आरपीएफ यात्रियों के सामान की चोरी और डकैती के मामलों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी कैमरों और फेस रिकॉग्निशन सिस्टम तकनीक का भी उपयोग कर रही है। सितंबर 2024 तक सीसीटीवी और एफआरएस तकनीक के जरिए टीओपीबी के 528 मामलों और डकैती के 7 मामलों का पता लगाया गया है।
साथ ही सितंबर, 2024 तक पश्चिम रेलवे सुरक्षा बल ने छेड़छाड़ के 45 मामलों में 39 लोगों को और बलात्कार के 5 मामलों में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पश्चिम रेलवे आरपीएफ ने यात्रियों के सामान की चोरी के रोकथाम के लिए कई कदम उठाए हैं। इन कदमों में मुंबई उपनगरीय खंड के प्लेटफार्मों पर 200 से अधिक महाराष्ट्र सुरक्षा बल कर्मचारियों की अतिरिक्त तैनाती शामिल की है। इसके अलावा, चौकियों पर सीसीएनटीएस/आईसीजेएस (अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली/अंतर-संचालित आपराधिक न्याय प्रणाली) के माध्यम से अपराधियों पर नियमित निगरानी रखी जाती है। साथ ही स्टेशन परिसर में नियमित अभियान चलाए जाते हैं, ताकि रेलवे एक्ट की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपराधियों की धरपकड़ की जा सके।
चुनिंदा ट्रेनों में 15 मेरी सहेली टीमें भी तैनात की गई हैं और अकेले यात्रा करने वाली महिला यात्रियों की प्रभावी सुरक्षा के लिए प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर 11 “ ई-मेरी सहेली ” टीमें शुरू की गई हैं। रोजाना औसतन 133 रात्रि मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में आरपीएफ स्टाफ द्वारा निगरानी की जाती है और रोजाना 68 ट्रेनों में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए मिश्रित ट्रेन एस्कॉर्टिंग के तौर पर आरपीएफ महिला और पुरुष स्टाफ की तैनाती की जाती है।