Maharashtra New Lokayukta Retired Justice Sunil Shukre: महाराष्ट्र के प्रशासनिक और न्यायिक इतिहास में पारदर्शिता की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुनील बालकृष्ण शुक्रे ने महाराष्ट्र लोकायुक्त संस्था के नए अध्यक्ष के रूप में पद की शपथ ग्रहण कर ली है। मुंबई स्थित ऐतिहासिक राजभवन में आयोजित एक विशेष शपथ ग्रहण समारोह में राज्य के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
राजभवन के इस गरिमामय कार्यक्रम में राज्य का शीर्ष नेतृत्व एक साथ नजर आया। समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार तथा विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इसके अलावा, राज्य के कई वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस और न्यायिक अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण क्षण के गवाह बने।
न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे कानूनी दुनिया का एक जाना-माना और बेहद सम्मानित नाम हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुए जस्टिस शुक्रे ने अपनी न्यायिक सेवा के दौरान नागपुर बेंच सहित हाईकोर्ट की विभिन्न पीठों में जज के रूप में सेवा दी है।
रिटायर्ड जस्टिस सुनील शुक्रे का जन्म 25 अक्टूबर 1961 को हुआ था। उन्होंने 1980 में पुणे यूनिवर्सिटी से अपनी बैचलर डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने अमरावती के डॉ. पंजाबराव देशमुख लॉ कॉलेज से LL.B. की पढ़ाई पूरी की और नागपुर यूनिवर्सिटी से कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में LL.M. की डिग्री हासिल की।
जस्टिस सुनील शुक्रे ने न्यायिक सेवा में कई अहम पदों पर काम किया है, जिनमें कोल्हापुर में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में रजिस्ट्रार (प्रशासन), उत्तन (ठाणे) में महाराष्ट्र ज्यूडिशियल एकेडमी में जॉइंट डायरेक्टर और नागपुर में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के पद शामिल हैं।
सुनील शुक्रे ने मार्च 2011 में बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल का पद संभाला और 2013 में उन्हें जज के तौर पर प्रमोट किया गया। वे अक्टूबर 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट से रिटायर हुए।
बॉम्बे हाई कोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद जस्टिस सुनील शुक्रे को महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (MSCC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल में आयोग ने राज्य में मराठा समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थितियों का विस्तृत व वैज्ञानिक अध्ययन किया। उनके नेतृत्व में तैयार की गई ऐतिहासिक रिपोर्ट के आधार पर ही महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का कानूनी प्रावधान लागू किया था।
लोकायुक्त संस्था राज्य स्तर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर लगाम लगाने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में से एक है। लोकायुक्त के पास सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, लोक सेवकों और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और प्रशासनिक कुप्रबंधन की शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करने की शक्तियां होती हैं।
लोकायुक्त कानून के प्रावधानों के अनुसार, अध्यक्ष का कार्यकाल पद संभालने की तिथि से 5 वर्ष या उनकी आयु 70 वर्ष पूरी होने तक (जो भी पहले हो) होता है।