RBI ने वित्तीय बाजारों के लिए TCCFM समिति का गठन किया।
डिप्टी गवर्नर रोहित जैन समिति के अध्यक्ष होंगे।
समिति में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के सात बाहरी सदस्य शामिल हैं।
मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों और विदेशी मुद्रा बाजार की समीक्षा होगी।
Rohit Jain RBI Deputy Governor: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को बाजार पक्षकारों से संवाद को आसान बनाने क लिए टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी फॉर फाइनेंशियल मार्केट (TCCFM) का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन करेंगे।
आरबीआई के बयान के अनुसार, यह समिति भारतीय रिजर्व बैंक के लिए एक मंच का काम करेगी, जहां वह मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा बाजारों और इनसे जुड़े डेरिवेटिव बाजारों एवं बुनियादी ढांचे से संबंधित नीतिगत और परिचालन मामलों पर बाजार के प्रतिभागियों और पक्षकारों के साथ व्यवस्थित रूप से बातचीत कर सकेगी।
जैन के अलावा, इस समिति में सात बाहरी सदस्य होंगे जो बैंकों, बाजार संघों, क्लियरिंग संस्थानों और वित्तीय सेवा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह समिति हर तिमाही में कम से कम एक बार बैठक करेगी।
इन बाहरी सदस्यों में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य और IIT बॉम्बे में 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' अनंत नारायण, फिक्स्ड इनकम मनी मार्केट एंड डेरिवेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FIMMDA) के चेयरमैन और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के उप प्रबंध निदेशक शमशेर सिंह और एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक नीरज गंभीर शामिल हैं।
अन्य सदस्यों में ICICI बैंक के ट्रेजरी और इकोनॉमिक रिसर्च प्रमुख शैलेंद्र झिंगन, सिटी इंडिया के प्रबंध निदेशक और बाजार प्रमुख आदित्य बागरी, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नंद किशोर और मॉर्गन स्टेनली इंडिया के प्रबंध निदेशक रिधम देसाई शामिल हैं।
कमेटी के कार्यक्षेत्र में मनी मार्केट, सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा और इनसे जुड़े डेरिवेटिव बाजारों के कामकाज, कार्यकुशलता, तरलता और लचीलेपन से जुड़े मुद्दों की जांच करना शामिल है। यह इन बाजारों को और अधिक गहरा और व्यापक बनाने के उपायों की भी पहचान करेगी।
यह पैनल वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने वाले उभरते नीतिगत और परिचालन संबंधी मुद्दों की जांच करेगा, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) के उपायों को लागू करना और बाजार में आने वाली अनपेक्षित बाधाओं की पहचान करना शामिल है।
इसके कार्यक्षेत्र में ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट, रिपोर्टिंग और अन्य बाजार अवसंरचनाओं से जुड़े विषय एवं इनसे संबंधित विनियामक और परिचालन ढांचों पर विचार करना शामिल है।
इसके अलावा, समिति अंतरराष्ट्रीय और घरेलू घटनाक्रमों, वित्तीय नवाचारों और उभरते उन जोखिमों पर चर्चा करेगी, जिनका भारतीय वित्तीय बाजारों पर असर पड़ सकता है। आरबीआई बाजार से जुड़े कुछ खास मुद्दों या व्यापक आर्थिक पहलुओं को भी जांच के लिए इस समिति के पास भेज सकता है।