रमाबाई अंबेडकर नगर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

रमाबाई आंबेडकर नगर पुनर्विकास को नई रफ्तार, पर्यावरण मंजूरी के बाद शुरू होगा 5,623 घरों का निर्माण

Mumbai Slum Rehabilitation Housing Plan: मुंबई के पूर्वी उपनगर में रमाबाई आंबेडकर नगर पुनर्विकास परियोजना निर्णायक चरण में पहुंच गई है। हजारों परिवारों को नए घर के साथ नई पहचान मिलेगी।

अपूर्वा नायक

Ramabai Ambedkar Nagar Redevelopment Project: मुंबई के पूर्वी उपनगर में स्थित रमाबाई आंबेडकर नगर स्लम पुनर्विकास परियोजना ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है।

एमएमआरडीए ने परियोजना के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से औपचारिक मंजूरी मांगी है। अनुमति मिलते ही पहले चरण का निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। पिछले वर्ष अक्टूबर में भूमिपूजन हुआ था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियों के अभाव में काम गति नहीं पकड़ सका।

इसी बीच एसआरए ने निर्दिष्ट आरजी (रिक्रिएशन ग्राउंड) प्लॉट से शेष बचे 200 से अधिक परिवारों का पुनर्वास शुरू कर दिया है। दो वर्षों का किराया मुआवजा एसआरए अपने संसाधनों से वितरित कर रहा है।

31.83 हेक्टेयर में फैली है परियोजना

अधिकारियों के अनुसार, पहले यह जमीन तत्काल आवश्यक नहीं थी, लेकिन अब एमएमआरडीए को परियोजना निष्पादन के लिए इसकी आवश्यकता है। कुछ धार्मिक ढांचों को अस्थायी रूप से आरजी प्लॉट पर स्थानांतरित किया जाएगा। मास्टर प्लान के अनुसार पूरी परियोजना 31.83 हेक्टेयर में फैली है।

लीज के माध्यम से राजस्व अर्जित करेगा एमएमआरडीए

पहले चरण में 6.95 हेक्टेयर क्षेत्र में 5,623 आवासीय इकाइयों का निर्माण प्रस्तावित है। कुल मिलाकर 30 पुनर्वास इमारतों में लगभग 17,000 घर बनाए जाएंगे। प्रत्येक इमारत में बेसमेंट पार्किंग, व्यावसायिक ग्राउंड या स्टिल्ट फ्लोर और 22 आवासीय मंजिलें होंगी, जिनकी ऊंचाई 70 मीटर तक जाएगी। 300 वर्गफुट के प्रत्येक एक कमरे वाले फ्लैट के लिए आठ लिफ्ट की व्यवस्था की जाएगी।

डीसीपीआर 2034 की धारा 33(10) के तहत परियोजना में आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, फिटनेस सेंटर, सामुदायिक भवन, युवा केंद्र, पुस्तकालय और सोसायटी कार्यालय जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी। इस पुनर्विकास से पूर्वी फ्रीवे के विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध होगी।

एमएमआरडीए खाली भूखंडों की नीलामी और लीज के माध्यम से राजस्व अर्जित करेगा, जिसमें 20 प्रतिशत लाभांश एसआरए को दिया जाएगा। 8,498 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना संस्थागत ऋण से वित्तपोषित होगी, जिसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र की भागीदारी शामिल है। यह एमएमआरडीए की पहली स्लम पुनर्विकास पहल है।

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