मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व राज ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

शिंदे के बाद CM फडणवीस से भी मिलेंगे राज; क्या MNS थामेगी महायुति का हाथ! डिप्टी सीएम से क्यों की थी मुलाकात?

Raj Thackeray Eknath Shinde Meeting: महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बाद राज ठाकरे और एकनाथ शिंदे की मुलाकात ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। क्या यह नए गठबंधन का संकेत है या केवल शिष्टाचार भेंट?

सूर्यप्रकाश मिश्र

Raj Thackeray Will Meet CM Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र में एक भी विधायक, सांसद न होने के बावजूद मनसे प्रमुख राज ठाकरे राजनीतिक रूप से हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में जब भी राज ठाकरे और सत्ता पक्ष के किसी बड़े नेता की मुलाकात होती है, तो कयासों का दौर शुरू होना लाजमी है। हाल ही में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक आवास 'नंदनवन' जाकर उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, खासकर इसलिए क्योंकि पिछले नगर निगम चुनावों में राज ठाकरे महायुति सरकार पर काफी हमलावर रहे थे।

हर मुलाकात राजनीति के लिए नहीं होती

शुक्रवार को अपने आवास 'शिवतीर्थ' पर पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद राज ठाकरे मीडिया से रूबरू हुए। जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री शिंदे के साथ उनकी गुप्त मंत्रणा पर सवाल किया, तो राज ने अपने चिरपरिचित अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। राज ठाकरे ने पलटवार करते हुए पूछा, "क्या कल अगर मैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलूंगा, तो भी लोग यही कहेंगे कि नया गठबंधन बन रहा है?"

जनता के मुद्दे सरकार तक पहुंचाना जरूरी

राज ठाकरे ने कहा कि चुनाव अब बीत चुके हैं और अगले बड़े चुनाव में अभी तीन साल का समय है। उन्होंने व्यावहारिक राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में एकनाथ शिंदे और उनकी टीम सत्ता में है। ऐसे में यदि राज्य के विकास के लिए कुछ सुझाव देने हैं या जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना है, तो मुख्यमंत्री से मिलना आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे महानगरों में नागरिक सुविधाओं की स्थिति खराब है। टोल की समस्या हो या बुनियादी ढांचे की, अगर हम अच्छे काम करवाना चाहते हैं, तो संवाद जरूरी है।

MNS की भविष्य की रणनीति

राज ठाकरे ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में नहीं है। जहाँ जरूरत होगी, वहाँ मनसे सरकार को सुझाव देगी और जहां जनहित की अनदेखी होगी, वहाँ मनसे अपना पुराना 'आंदोलनकारी' रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी। फिलहाल, शिंदे और ठाकरे की यह नजदीकी विपक्ष के लिए चिंता का विषय जरूर बन सकती है।

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