Raj Thackeray Mumbai Speech: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई में आयोजित गर्जना मोर्चे को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा कि वे वर्ष 2017-2018 से ही वोटिंग मशीनों और मतदाता सूचियों में हो रही धांधली के खिलाफ लगातार आवाज उठाते आ रहे हैं, लेकिन उस समय किसी ने उनकी चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया।
उस दौरान वे सोनिया गांधी और ममता बनर्जी सहित कई राष्ट्रीय नेताओं से मिले थे और चुनावों के बहिष्कार तक का सुझाव दिया था। ठाकरे ने कहा कि 2017 से वे जो बातें कह रहे थे, आज वही सच्चाई सबके सामने आ चुकी है और विपक्षी दलों को भी यह बात अब समझ में आने लगी है।
अपनी बात रखते हुए राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उन्हें भाजपा के नए सिरे से सत्ता में आने पर कोई व्यक्तिगत गुस्सा या आपत्ति नहीं है, बल्कि उनका विरोध इस बात से है कि सत्ता का इस्तेमाल किस तरीके से किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में किसे सरकार में बिठाना है और किसे विपक्ष में, इसका फैसला देश के मतदाताओं को करना चाहिए, न कि चुनाव आयोग को। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण बनाकर देश के जंगल, जमीनें, हवाई अड्डे और बंदरगाह सब एक ही उद्योगपति के हवाले किए जा रहे हैं। उन्होंने तंज कसा कि सरकार में अब जनता का कोई डर नहीं रह गया है क्योंकि उन्हें लगता है कि चुनाव आयोग उनके साथ है, इसलिए वे जैसे चाहें वैसे चुनाव जीत सकते हैं।
2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के आंकड़ों की तुलना करते हुए मनसे प्रमुख ने चुनाव प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को महाराष्ट्र में 2 करोड़ 44 लाख 77 हजार 27 वोट मिले थे। लेकिन महज 6 महीने के भीतर हुए विधानसभा चुनाव में अचानक 40 से 60 लाख नए मतदाता बढ़ गए और भाजपा का वोट बढ़कर 3 करोड़ 16 लाख 16 हजार हो गया।
ठाकरे ने सवाल उठाया कि आखिर 6 महीने में अचानक इतने लाख मतदाता कहां से और कैसे बढ़ गए? उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बावजूद पूरे महाराष्ट्र में सन्नाटा पसरा हुआ था और जनता में जीत का कोई उत्साह या जल्लोष नजर नहीं आ रहा था, जो इस चुनावी नतीजे की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
SIR प्रक्रिया पर प्रहार करते हुए राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि पहले चुनाव में 40 से 60 लाख वोट बढ़ाकर सत्ता हासिल की गई और अब SIR के माध्यम से राज्य के 2 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए जा रहे हैं।
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व भाजपा मंत्री आर. के. सिंह के बयानों का हवाला देते हुए ठाकरे ने कहा कि 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट' की धारा 21 के तहत SIR केवल बाढ़, भूकंप या बड़े पैमाने पर विस्थापन जैसी असाधारण परिस्थितियों में ही लागू किया जा सकता है। बिना किसी आपात स्थिति के पूरे देश या राज्य में एक साथ SIR चलाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
गर्जना मोर्चे के मंच से राज ठाकरे ने देश के सभी राजनीतिक दलों से मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आह्वान किया और दो प्रमुख मांगें रखीं।
SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द किया जाए: महाराष्ट्र और देश भर में गैर-कानूनी तरीके से चलाई जा रही SIR प्रक्रिया को तत्काल बंद किया जाए।
बैलेट पेपर से कराए जाएं चुनाव: EVM का इस्तेमाल बंद कर भविष्य के सभी चुनाव केवल बैलेट पेपर से आयोजित किए जाएं।
उन्होंने सभी विपक्षी नेताओं से दिल्ली जाकर इस मुद्दे पर एक सुर में आवाज उठाने की अपील की ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बहाल हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोकतांत्रिक ढांचे को इसी तरह ध्वस्त किया जाता रहा, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए देश चलाना मुश्किल हो जाएगा।