Priyanka Chaturvedi vs Yogi Adityanath On Vande Mataram (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)  
मुंबई

वंदे मातरम पर रार: प्रियंका चतुर्वेदी ने योगी आदित्यनाथ को दी राष्ट्रगीत के 6 पद सुनाने की चुनौती

Vande Mataram Controversy: शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को 'वंदे मातरम' के छह पद सुनाने की चुनौती दी और राष्ट्रभक्ति के नाम पर राजनीति का आरोप लगाया।

अनिल सिंह

Priyanka Chaturvedi vs Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राष्ट्रभक्ति और 'वंदे मातरम' को लेकर दिए गए हालिया बयान ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की फायरब्रांड नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के बयान को विशुद्ध रूप से "राजनीतिक दिखावा" करार देते हुए उन्हें एक सीधी चुनौती दे डाली है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाया है कि दूसरों को राष्ट्रभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने से पहले क्या खुद मुख्यमंत्री को राष्ट्रगीत की पूरी जानकारी है।

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा और उनके नेता राष्ट्रीय प्रतीकों का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ और समाज में विभाजन पैदा करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे सार्वजनिक रूप से 'वंदे मातरम' के सभी छह पदों को गाकर सुनाएं। प्रियंका के इस आक्रामक रुख ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहाँ अब राष्ट्रभक्ति के मापदंडों पर चर्चा हो रही है।

छह पद सुनाएं योगी आदित्यनाथ, प्रियंका की सीधी चुनौती

प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह योगी आदित्यनाथ के लिए केवल एक राजनीतिक स्टंट है। क्या कोई उनसे यह पूछ सकता है कि वे पहले ‘वंदे मातरम’ के पूरे छह पद गाकर सुनाएं? उसके बाद ही वे यह तय करें कि कौन राष्ट्रविरोधी है और कौन देशभक्त।" प्रियंका ने आरोप लगाया कि भाजपा राष्ट्रगीत का निजी और राजनीतिक लाभ के लिए राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है, जो पूरी तरह से विभाजनकारी है।

विपक्ष का आरोप: असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश

विपक्षी दलों ने प्रियंका चतुर्वेदी के सुर में सुर मिलाते हुए सरकार को घेरा है।

विभाजनकारी राजनीति: विपक्ष का मानना है कि जब भी बेरोजगारी, महंगाई या आर्थिक मंदी जैसे गंभीर सवाल उठते हैं, तो सरकार 'वंदे मातरम' और 'राष्ट्रवाद' जैसे भावनात्मक मुद्दों को ढाल बना लेती है।

देशद्रोह का ठप्पा: प्रियंका ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि किसी भी असहमत आवाज को तुरंत 'देशद्रोही' या 'राष्ट्रविरोधी' करार दे दिया जाता है। उनका तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान हृदय में होना चाहिए, न कि इसे किसी की देशभक्ति मापने का पैमाना बनाया जाना चाहिए।

भाजपा की चुप्पी और बढ़ता सियासी पारा

प्रियंका चतुर्वेदी के इस बयान के बाद फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक या तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता और सोशल मीडिया विंग ने प्रियंका चतुर्वेदी को उनके पुराने बयानों पर घेरना शुरू कर दिया है।

आगामी चुनाव: राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के आगामी चुनावों को देखते हुए ऐसे मुद्दों को जानबूझकर हवा दी जा रही है।

संवेदनशीलता: 'वंदे मातरम' एक ऐसा गीत है जिससे करोड़ों भारतीयों की भावनाएं जुड़ी हैं, ऐसे में इसे चुनौती के रूप में पेश करना भाजपा के लिए जवाबी हमले का मौका भी बन सकता है।

सियासी जंग: अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस चुनौती को स्वीकार करते हैं या भाजपा इसे प्रियंका चतुर्वेदी की अज्ञानता बताकर खारिज कर देती है।

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