Praful Patel Sunil Tatkare Sharad Pawar Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति में 'पॉवर सेंटर' कहे जाने वाले शरद पवार के आवास सिल्वर ओक में 12 मई की रात को हुई बैठक ने एनसीपी के दोनों गुटों में खलबली मचा दी है। दरअसल, अजित पवार गुट की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार द्वारा केंद्रीय चुनाव आयोग को राष्ट्रीय कार्यकारिणी के संबंध में एक आधिकारिक पत्र सौंपा गया था। इस पत्र में प्रफुल्ल पटेल (कार्यकारी अध्यक्ष) और सुनील तटकरे (प्रदेश अध्यक्ष) जैसे दिग्गज नेताओं के नाम तो शामिल थे, लेकिन उनके संगठनात्मक पदों को गायब कर दिया गया था। इसी अपमान और आंतरिक गुटबाजी से परेशान होकर दोनों नेताओं ने शरद पवार का रुख किया।
सिल्वर ओक से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, प्रफुल्ल पटेल पिछले कई दिनों से शरद पवार से मिलने का समय मांग रहे थे। पवार ने उन्हें 12 मई का समय दिया था, लेकिन रणनीति के तहत प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे भी रात 8 बजे अचानक वहां पहुंच गए। तटकरे के आने की भनक खुद शरद पवार को भी नहीं थी। लगभग 15 से 20 मिनट चली इस त्रिस्तरीय चर्चा में सुनील तटकरे अधिकांश समय मौन रहे, जबकि प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी के संचालन और अजित पवार के परिवार के बढ़ते दखल पर अपनी बात रखी।
इस बैठक का सबसे मुख्य एजेंडा अजित पवार के बेटे पार्थ पवार के प्रति वरिष्ठ नेताओं का बढ़ता असंतोष था। प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार के सामने सीधे तौर पर पार्थ पवार के काम करने के तरीके और वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर फैसले लेने की आदत पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। पटेल का मानना है कि पार्टी के भीतर कुछ युवा चेहरों की वजह से पुराने और वफादार नेताओं का दम घुट रहा है और सुनेत्रा पवार के पत्र में पदों का जिक्र न होना भी इसी अंदरूनी राजनीति का हिस्सा है।
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राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने इस पूरी मुलाकात के दौरान बेहद सधा हुआ रुख अपनाया। उन्होंने प्रफुल्ल पटेल द्वारा पार्थ पवार और पार्टी के फैसलों को लेकर की गई सभी शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना। हालांकि, संगठन के आंतरिक मामलों या अजित गुट की कलह पर उन्होंने कोई भी टिप्पणी या आश्वासन देने से साफ मना कर दिया। सूत्रों के अनुसार, पवार ने इस विवादित विषय को टालते हुए अन्य सामान्य राजनीतिक मुद्दों पर बात करना बेहतर समझा।
इस सीक्रेट मीटिंग के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या महायुति (BJP-शिवसेना-NCP) के भीतर अजित पवार की पकड़ ढीली हो रही है? वरिष्ठ नेताओं का इस तरह सीधे शरद पवार के पास जाकर गुहार लगाना यह दर्शाता है कि अजित गुट के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मुलाकात का असर आगामी विधानसभा चुनाव की टिकट शेयरिंग और पार्टी के आंतरिक नेतृत्व पर क्या पड़ता है।