'व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम' (सोर्स: सोशल मीडिया)  
मुंबई

पुणे: मनपा का 'व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम' 3 महीने में ठप, 100 वाहनों के GPS बंद; दुरुपयोग छिपाने का गहराया संदेह

Pune PMC News: पुणे मनपा का व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम तीन महीने में ही जवाब दे गया है। 300 में से 100 वाहनों के जीपीएस बंद हैं, जिससे गाड़ियों के अवैध इस्तेमाल को छिपाने का शक बढ़ गया है।

रूपम सिंह

Pune PMC Vehicle Tracking: पुणे महानगरपालिका (मनपा) के वाहनों की निगरानी और आपातकालीन सेवाओं के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से शुरू किया गया व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) महज तीन महीने के भीतर ही गंभीर तकनीकी समस्याओं का शिकार हो गया है। मनपा के विभिन्न विभागों के 300 वाहनों में लगाए गए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरणों में से करीब 100 मशीनें बंद हो चुकी हैं, जिससे वाहनों की वास्तविक गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो गया है।

100 में से 65 जीपीएस अब भी बंद

जानकारी के अनुसार, खराब हुए 100 जीपीएस उपकरणों में से अब तक केवल 35 को ही दुरुस्त किया जा सका है, जबकि 65 वाहनों में ट्रैकिंग सिस्टम अभी भी बंद पड़ा है। तकनीकी खामियों को दूर करने में हो रही देरी ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम को जल्द पूरी तरह बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

1,333 वाहनों का विशाल बेड़ा

पुणे मनपा के पास कुल 1,333 वाहन हैं, जिनमें कचरा संकलन वाहन, अधिकारियों की कारें, जेसीबी मशीनें, एंबुलेंस और अन्य सेवा वाहन शामिल हैं। इन वाहनों की निगरानी, ईंधन की बचत और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से वीटीएस लागू किया गया था। शुरुआती दौर में 300 वाहनों को इस प्रणाली से जोड़ा गया था।

पहले भी लग चुके हैं दुरुपयोग के आरोप

मनपा के वाहनों को बिना अनुमति पुणे शहर से बाहर ले जाने और निजी कार्यों में इस्तेमाल किए जाने के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। सरकारी ईंधन की बर्बादी और वाहनों के अनधिकृत उपयोग को रोकने के लिए ही ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया गया था। लेकिन अब बड़ी संख्या में जीपीएस उपकरणों के बंद हो जाने से निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ गई है।

सिस्टम से छेड़छाड़ की चर्चा

मनपा के गलियारों में इस बात की चर्चा है कि कुछ वाहनों के जीपीएस उपकरणों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई हो सकती है। सूत्रों का दावा है कि वाहनों के कथित अवैध उपयोग की जानकारी छिपाने के लिए ट्रैकिंग सिस्टम को निष्क्रिय किया गया और मरम्मत कार्य में भी बाधाएं पैदा की जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जांच और जवाबदेही की मांग

विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी खराबी के पीछे लापरवाही या जानबूझकर की गई छेड़छाड़ सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, प्रशासन पर ट्रैकिंग प्रणाली को जल्द पूरी तरह चालू कर वाहनों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

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