Old Monk Rum Controversy: मदिरा प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय ब्रांड ओल्ड मॉन्क इन दिनों एक बहुत बड़े कानूनी और तकनीकी विवाद में फंस गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने मुंबई हाईकोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला रुख अपनाते हुए दावा किया है कि ओल्ड मॉन्क को रम की श्रेणी में रखकर न तो बेचा जा सकता है और न ही मार्केटिंग की जा सकती है।
FSSAI के इस कदम के बाद से ही इस लोकप्रिय ब्रांड के भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब FSSAI ने महाराष्ट्र में मैकडॉवेल्स नं. 1 और ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। FSSAI ने जांच में पाया कि उत्पादक कंपनियां न्यूट्रल स्पिरिट्स में रम फ्लेवरिंग मिलाकर इसे तैयार कर रही हैं।
प्रभारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र व्ही. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान FSSAI का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राजशेखर गोविलकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रम जैसा स्वाद रखने वाले न्यूट्रल स्पिरिट्स को किसी भी हाल में वास्तविक रम नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, सिर्फ फ्लेवर मिला देने से कोई पेय पदार्थ पारंपरिक रम की श्रेणी में आने योग्य नहीं हो जाता।
ओल्ड मॉन्क की निर्माता कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर प्राइवेट लिमिटेड ने 9 अगस्त को FSSAI की इस कार्रवाई को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। FSSAI द्वारा कारखानों के निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से तीन गंभीर आरोप लगाए गए थे बोतलों पर की गई लेबलिंग, शराब का वास्तविक कंपोजिशन और उसमें उपयोग किए गए कृत्रिम स्वादवर्धक घटक।
31 अगस्त को हुई सुनवाई में मुंबई हाईकोर्ट ने इस प्रतिबंध पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके चलते ब्रांड पर प्रतिबंध जारी रहा। इसके बाद कानूनी राहत पाने और अपनी बिक्री बहाल करने के लिए निर्माता कंपनी ने कोर्ट के सामने पैकेजिंग लेबल में बड़े बदलाव करने की इच्छा जताई। कंपनी ने कोर्ट में एक संशोधित लेबल पेश किया है, जिसमें Additional Flavor की बात को बहुत स्पष्ट और बोल्ड अक्षरों में लिखा गया है और साथ ही बोतलों से 7-years old blended का पुराना दावा हटा दिया गया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी संवेदनशीलता दिखाई कि व्यापारिक लेन-देन और इतने बड़े ब्रांड के कारोबार को रातों-रात पूरी तरह से ठप नहीं किया जा सकता। इसी वजह से कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह को FSSAI के आवश्यक निर्देशों के साथ कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, ओल्ड मॉन्क द्वारा नए लेबलों की पेशकश किए जाने के बाद भी FSSAI इसे रम के रूप में वर्गीकृत करने के सख्त खिलाफ है। अब इस दिलचस्प और बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होनी तय हुई है। उसी दिन कोर्ट इस बात पर अंतिम फैसला ले सकता है कि ओल्ड मॉन्क पर लगी बिक्री की पाबंदी हटाई जाएगी या नहीं। तब तक के लिए, ओल्ड मॉन्क के शौकीनों की सांसें अटकी रहेंगी।