Sunetra Pawar Beed Press Conference Controversy: बीड दौरे के दौरान महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और बीड जिले की पालकमंत्री सुनेत्रा पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हस्तक्षेप करने के आरोपों के बीच NCP के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने विधायक धनंजय मुंडे को सार्वजनिक रूप से नसीहत दी है। तटकरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही संबंधित जिले का विधायक पालकमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच पर मौजूद रह सकता है, लेकिन बातचीत के दौरान हस्तक्षेप करना या खुद सक्रिय भूमिका निभाना कतई उचित नहीं है।
मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनील तटकरे ने कहा कि उनकी इस मुद्दे पर अभी तक धनंजय मुंडे से कोई बातचीत नहीं हुई है, इसलिए बीड में वास्तव में क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता वही व्यक्ति होता है, जिसके नाम पर कार्यक्रम आयोजित किया गया हो।
NCP के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि पालकमंत्री की बैठक में विधायक का साथ बैठना सामान्य बात है, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य व्यक्ति को ही संवाद करना चाहिए। मैं भी जब मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले मेरे जिले में आए थे, तब उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच पर मौजूद था, लेकिन मैंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
सुनील तटकरे ने कहा कि सुनेत्रा पवार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उन्हें मीडिया के सामने अपनी बात रखने की पूरी क्षमता है। पार्टी के सभी नेताओं को उन पर भरोसा है। बीड की घटना की पूरी पृष्ठभूमि समझना जरूरी है, लेकिन एक परंपरा यह भी है कि जब कोई वरिष्ठ नेता या मंत्री पत्रकारों से बातचीत कर रहा हो, तब उसके साथ बैठे अन्य नेताओं को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी के सभी सहयोगी भविष्य में इस मर्यादा का पालन करेंगे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक धनंजय मुंडे ने मंगलवार को बीड में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार शाम पांच बजे बीड पहुंची थीं और रात 11 बजे तक लगातार बैठकों में व्यस्त रहीं। अगले दिन भी उन्होंने कई बैठकें पूरी करने के बाद मीडिया से बातचीत की।
धनंजय मुंडे के अनुसार, पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल बयान दिया जाएगा, प्रश्नोत्तर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार निजी दुख भुलाकर जनता के बीच काम कर रही थीं और जब अजित पवार से जुड़े दो मुद्दों का जिक्र आया तो वे भावुक हो गईं। उन्हें लगा कि वे रो पड़ेंगी, इसलिए उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि सवाल पूछना बंद करें।