प्रफुल पटेल व सुनेत्रा पवार (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

प्रफुल पटेल को ठिकाने लगाने के चक्कर में सुनेत्रा कर गई सेल्फ गोल? एक चिट्ठी से फंसी पूरी NCP

NCP Internal Conflict: अजित पवार के निधन के बाद NCP में गृहयुद्ध छिड़ गया है। सुनेत्रा पवार के एक पत्र ने पार्टी के कई फैसलों पर सवाल खड़े कर दिए है। यदि पत्र लागू होता है तो क्या होगा?

आकाश मसने

Sunetra Pawar EC Letter: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर का संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहां अपनों की ही चाल अपनों पर भारी पड़ती दिख रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद पार्टी की कमान संभालने को लेकर मचे घमासान के बीच, वर्तमान अध्यक्ष सुनेत्रा पवार द्वारा चुनाव आयोग (EC) को लिखा गया एक पत्र उनके लिए 'सेल्फ गोल' साबित होता नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस एक तकनीकी गलती के कारण सुनेत्रा पवार का अध्यक्ष पद और उनके बेटे पार्थ पवार की राज्यसभा उम्मीदवारी, दोनों ही कानूनी पेच में फंस गए हैं।

सुनेत्रा पवार का वो पत्र, जो बन गया गले की फांस

अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने आग्रह किया कि 28 जनवरी के बाद पार्टी की ओर से किए गए किसी भी पत्राचार या दस्तावेज को स्वीकार न किया जाए। हैरानी की बात यह है कि सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त करने संबंधी कार्यकारिणी की बैठक की सूचना और जरूरी दस्तावेज प्रफुल पटेल ने 28 जनवरी के बाद ही चुनाव आयोग को भेजे थे। यदि चुनाव आयोग सुनेत्रा के ही पत्र को आधार मानकर 28 जनवरी के बाद की कार्यवाही रद्द करता है, तो तकनीकी रूप से सुनेत्रा पवार की अपनी नियुक्ति ही अवैध हो जाएगी।

पार्थ पवार का राज्यसभा भविष्य अधर में

इस विवाद का सबसे बड़ा नुकसान सुनेत्रा के बेटे पार्थ पवार को होता दिख रहा है। पार्थ ने राज्यसभा चुनाव के लिए जो 'एबी फॉर्म' जमा किया है, उस पर NCP के कार्यकारी प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे के हस्ताक्षर हैं। चूंकि ये फॉर्म 28 जनवरी के बाद की प्रक्रिया का हिस्सा हैं, इसलिए यदि सुनेत्रा पवार की मांग मान ली जाती है, तो पार्थ पवार का नामांकन तकनीकी रूप से खारिज हो सकता है।

राज्यसभा के नामांकन भरते पार्थ पवार

क्या होगा आगे?

यदि चुनाव आयोग सुनेत्रा पवार के इस पत्र को लागू करता है तो एनसीपी कानूनी रूप से फंस जाएगी। ऐसे में क्या NCP राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनाव दोबारा कराना होगा? यह देखने वाली बात होगी। साथ ही पार्थ पवार की राज्य सभा उम्मीदवारों भी संकट में आ जाएगी।

प्रफुल्ल पटेल हुए किनारे, पवार परिवार का सीधा 'दिल्ली संपर्क'

पार्टी के भीतर केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और NCP के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल, जो कभी अजित पवार के सबसे खास माने जाते थे, अब हाशिये पर धकेले जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पवार परिवार ने अब भाजपा आलाकमान और विशेषकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधा संवाद स्थापित कर लिया है।

परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भाजपा और पवार परिवार के बीच किसी 'मध्यस्थ' या 'संदेशवाहक' की जरूरत नहीं है। वे चाहते हैं कि दिल्ली में होने वाली हर बातचीत सीधी और स्पष्ट हो। यह संकेत साफ है कि एनसीपी के भीतर प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे गुट की पकड़ ढीली करने के लिए पवार परिवार ने चक्रव्यूह रच दिया है। हालांकि पार्टी में सब ठीक है यह दिखाने के लिए सुनेत्रा पवार और पार्थ ने प्रफुल पटेल से दिल्ली मुलाकात भी की।

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