नवनीत राणा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

मैं नहीं झुकी क्योंकि मैं आत्मनिर्भर हूं... अमरावती में फिर गरजीं नवनीत राणा, विरोधियों को दी सीधी चेतावनी!

Navneet Rana Speech: मरावती की नवनीत राणा ने एक कार्यक्रम में विरोधियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, 'शेरनी अगर शांत है, तो दहाड़ना भूली नहीं। इसके साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे पर हमला बोला।

गोरक्ष पोफली

Navneet Rana Warns Opponents: अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा भले ही इस बार लोकसभा चुनाव में हार गई हों, लेकिन उनका तेवर और उनकी आक्रामकता कम होने का नाम नहीं ले रही है। अमरावती में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा और अपनी 'स्वाभिमानी' छवि को जनता के सामने एक बार फिर मजबूती से रखा।

नवनीत राणा ने राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए एक बड़ा और विस्फोटक बयान दिया। उन्होंने कहा कि लोग एक नगरसेवक पद के लिए दूसरों के पैरों में गिर जाते हैं, लेकिन नवनीत राणा का स्वाभिमान इतना अटल है कि उन्होंने राज्यसभा के अवसर को ठोकर मार दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, मैं इतनी कमजोर नहीं हूं कि राज्यसभा के लिए किसी के दरवाजे पर जाकर खड़ी हो जाऊं। उनके अनुसार, वह अपने विचारों पर पक्की हैं और स्वाभिमान से समझौता करना उनके स्वभाव में नहीं है।

शेरनी अगर शांत है, तो दहाड़ना भूली नहीं

अपनी हार पर बोलते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्व सांसद होने का दर्द उनके मन में जरूर है, लेकिन वह शांत बैठने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा, शेरनी अगर शांत है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह दहाड़ना भूल गई है। यह सीधा हमला अमरावती के नवनिर्वाचित सांसद बलवंत वानखेड़े और अन्य विरोधियों पर था, जो उनकी हार के बाद उन पर लगातार तंज कस रहे थे।

उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला: सत्ता जाने के बाद याद आए राम

नवनीत राणा ने शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने पुरानी कड़वाहट को याद करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे ने उन्हें हनुमान चालीसा पढ़ने के आरोप में 14 दिनों तक जेल में रखा, जहां उन्होंने 40 डिग्री की झुलसाती गर्मी झेली। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब उद्धव मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें हनुमान चालीसा से परहेज था, लेकिन जैसे ही कुर्सी गई और पार्टी बिखर गई, उन्हें अचानक भगवान राम और हनुमान चालीसा की याद आने लगी। उन्होंने आगे कहा कि अगर मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने हनुमान का नाम लिया होता, तो शायद आज न उनका घर टूटता और न ही उनकी पार्टी बर्बाद होती।

विकास पर भरोसा और पति का साथ

नवनीत राणा ने इस दौरान अपने पति और विधायक रवि राणा के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का साथ रवि राणा को हमेशा मिलता रहा है, जिससे क्षेत्र के हर गांव का विकास सुनिश्चित होगा। कुल मिलाकर, नवनीत राणा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चुनावी हार के बाद भी सक्रिय राजनीति में डटी रहेंगी और उनका आत्मनिर्भर तथा स्वाभिमानी रुख आने वाले विधानसभा चुनावों में विरोधियों के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगा।

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