सरसों तेल की कीमतों में उछाल (सोर्स: AI)
मुंबई

आटा-दाल के बाद सरसों तेल भी महंगा, महाराष्ट्र में पांच साल के ऊंचे स्तर पर पहुंची कीमतें; स्टॉक 7.75% कम

Mustard Oil Prices Rise In Maharashtra: सरसों का स्टॉक पिछले साल से 7.75% कम रहने और घरेलू मांग मजबूत होने से भाव करीब पांच साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। त्योहारों से मांग बढ़ने की उम्मीद है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Maharashtra Mustard Oil Strong Demand: देश भर में अलनीनो के चलते कहीं सूखा कहीं बाढ़ का प्रभाव खाद्य वस्तुओं पर दिखने लगा है। आटा दाल में में महंगाई के बाद अब सरसों तेल बाजार में तेजी का रंग और गहरा हो गया है। सीमित उपलब्धता और मजबूत मांग के बीच सरसों के भाव करीब पांच साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।

अक्टूबर की शुरुआत में बाजार में पिछले साल की तुलना में करीब 7.75 फीसदी कम स्टॉक रहने से आपूर्ति का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरसों के भाव की दिशा पर कारोबारियों की नजर बनी हुई है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर के मुताबिक, बाजार में सरसों की उपलब्धता सीमित है, जबकि घरेलू मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। यही समीकरण फिलहाल कीमतों को ऊंचा बनाए हुए है।

खल-डीओली में भी मांग का जोर

सरसों की क्रशिंग से निकलने वाली खल और डीओली की मांग मजबूत बनी हुई है। पशु आहार उद्योग से मिलने वाली मांग के चलते क्रशिंग मिलों की खरीदारी को भी सहारा मिल रहा है। दूसरी ओर, सरसों तेल के भाव में हाल के दिनों में तेजी दर्ज की गई है।

हालांकि, बाजार की तेजी के सामने एक बड़ी चुनौती सोया और पाम तेल के मुकाबले सरसों तेल का बढ़ता मूल्य अंतर है। यदि यह अंतर और बढ़ता है तो उपभोक्ता और थोक खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे ऊंचे स्तर पर सरसों तेल की तेजी सीमित हो सकती है।

त्योहारों से बढ़ेगी तेल की खपत

आगामी त्योहारी सीजन बाजार के लिए अहम है। त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की खपत बढ़ने की संभावना से सरसों तेल की मांग को समर्थन मिल सकता है। इससे सरसों की क्रशिंग और कच्चे माल की मांग भी बनी रहने की उम्मीद है।

रबी फसल पर टिकी बाजार की नजर

फिलहाल बाजार की नजर अगली रबी फसल पर है। अनुकूल मौसम रहने पर नई फसल की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं और मौजूदा आपूर्ति दबाव कुछ कम हो सकता है। लेकिन तब तक सीमित स्टॉक और मजबूत मांग सरसों के भाव को समर्थन देते रह सकते हैं।

बाजार का संकेत साफ है,

फिलहाल सरसों में तेजी का पलड़ा भारी है, लेकिन ऊंचे भाव पर सोया-पाम तेल से प्रतिस्पर्धा और आने वाली रबी फसल आगे की तेजी की रफ्तार तय करेगी।

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