

Mustard Stock Update 2026: देश की प्रमुख मंडियों में सरसों की आवक में लगातार कमी आने के बीच आने वाले दिनों में सरसों तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है। मार्च-अगस्त 2026 के दौरान मंडियों में सरसों की कुल आवक करीब 78.50 लाख टन रही।
वहीं, सरकारी एजेंसियों की खरीद बेहद सीमित रहने से बाजार में उपलब्ध स्टॉक का बड़ा हिस्सा व्यापारियों, स्टॉकिस्टों और तेल मिलर्स के पास रहा है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर के अनुसार, जुलाई-अगस्त में सरसों की घरेलू मंडी आवक मार्च-अप्रैल की तुलना में घटकर करीब एक-तिहाई रह गई है। हालांकि, सरसों के थोक भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर बने रहने के कारण किसानों की बिक्री जारी रही और सीजन के इस चरण में आवक को सामान्य माना जा सकता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च में सरसों की आवक करीब 19 लाख टन, अप्रैल में 20 लाख टन, मई में 15.50 लाख टन, जून में 10 लाख टन, जुलाई में 7 लाख टन और अगस्त में 6.50 लाख टन रही। यानी शुरुआती महीनों में अधिक आवक के बाद लगातार गिरावट दर्ज की गई।
चालू वर्ष के 6 महीनों में कुल 78.50 लाख टन सरसों मंडियों में पहुंची, लेकिन सरकारी एजेंसियों ने केवल 50 हजार टन की खरीद की। बताया गया है कि बाजार भाव एमएसपी से ऊपर रहने के कारण नाफेड और हैफेड को सरकारी खरीद का सीमित अवसर मिला।
एजेंसियों के पास पहले से करीब 1 लाख टन स्टॉक था। नई खरीद के बाद यह बढ़कर 1.50 लाख टन हुआ, जिसमें से करीब 1.25 लाख टन की बिक्री हो चुकी है। अब लगभग 25 हजार टन स्टॉक बचा है।
रबी मार्केटिंग सीजन के लिए सरसों का उत्पादन अनुमान 107.25 लाख टन और शुरुआती पुराना स्टॉक 2 लाख टन बताया गया है। मार्च-अगस्त के दौरान करीब 69 लाख टन सरसों की क्रशिंग होने का अनुमान है।
1 सितंबर तक किसानों के पास करीब 20.75 लाख टन, स्टॉकिस्टों/प्रोसेसर्स के पास 11.25 लाख टन और सरकारी एजेंसियों के पास 25 हजार टन सरसों बची होने का अनुमान है। इस तरह कुल उपलब्ध स्टॉक करीब 32.25 लाख टन बैठता है। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सरसों तेल की कीमतों में तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि वास्तविक कीमतें आगे की आवक, क्रशिंग, मांग और मंडी भाव पर निर्भर करेंगी।