मुंबई जल मेट्रो परियोजना (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

Mumbai Water Metro को मिली रफ्तार, पहली इलेक्ट्रिक फेरी पहुंची शहर; 16 नए जलमार्गों पर चलेगी सेवा

Mumbai Water Metro Electric Ferry: मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना को बड़ी सफलता मिली है। पहली इलेक्ट्रिक हाइड्रोफॉइल फेरी शहर पहुंच चुकी है। 16 नए जलमार्गों पर सेवा शुरू होने से यात्रा समय घटेगा।

अपूर्वा नायक

Mumbai Water Metro Electric Ferry News: सड़क और रेल परिवहन पर बढ़ते दबाव के बीच अब समंदर मुंबई के लिए नया हाईवे बनने जा रहा है। महामुंबई को जलमार्गों के जरिए जोड़ने की महत्वाकांक्षी वॉटर मेट्रो परियोजना को बड़ी सफलता मिली है।

इसकी पहली इलेट्रिक फेरी शहर पहुंच चुकी है। परियोजना के तहत 16 नए जलमार्गों पर वॉटर मेट्रो का संचालन किया जाएगा। शुरुआती चरण में गेटवे ऑफ इंडिया-अलीबाग और मांडवा-वर्सोवा-मढ़ इन दो मार्गों पर सेवा शुरू करने की तैयारी है।

इसके बाद धीरे धीरे इसे विस्तार दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और मुंबई महानगर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। मुंबई महानगर क्षेत्र में वॉटर मेट्रो परियोजना को गति मिल गई है।

मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के लिए पहली कैंडेला पी-12 इलेट्रिक हाइड्रोफॉइल फेरी 27 मई को मुंबई पहुंची। यह नाव फिलहाल जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट में कस्टम क्लियरेंस की प्रक्रिया का इंतजार कर रही है। मत्स्य व्यवसाय एवं बंदर विकास मंत्री नितेश राणे ने इसकी जानकारी दी। इसी के साथ ही शहर और महानगर क्षेत्र में जल परिवहन के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में मुंबई में 21 मौजूदा और 16 नए जलमार्गों का विकास किया जाएगा।

कस्टम क्लियरेंस मिलने के बाद फेरी का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने पर इसे यात्री सेवा में शामिल किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि यह नाव तेज बहाव वाले पानी में भी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित कर सकती है। हालांकि, मानसून नजदीक होने के कारण सभी सुरक्षा परीक्षणों को प्राथमिकता दी जा रही है।

11 हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक फेरियां होंगी शामिल

  • मुंबई परियोजना के लिए कुल 11 कैंडेला पी-12 फेरियों का ऑर्डर दिया गया है। ये हाई स्पीड इलेक्ट्रिक हाइड्रोफॉइल फेरियां प्रति घंटे 40 किलोमीटर की रफ्तार से चल सकती है और एक बार में 30 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखती है। यह परियोजना मुंबई महानगर क्षेत्र में व्यापक जल परिवहन नेटवर्क विकसित करने की राज्य सरकार की योजना का हिस्सा है।
  • 340 किलोमीटर लंबा होगा नेटवर्क राज्य सरकार का लक्ष्य मुबई क्षेत्र में 340 किलोमीटर लंबा वॉटर मेट्रो नेटवर्क विकसित करना है। इस परियोजना पर लगभग 6,500 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसके तहत आधुनिक जलमार्ग, टर्मिनल और इलेक्ट्रिक फेरियों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे सड़क और रेल परिवहन पर दबाव कम होगा।

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देश के 18 शहरों में शुरू होगी वॉटर मेट्रो

कोच्चि वॉटर मेट्रो की सफलता के बाद केंद्र सरकार ने देश के 18 अन्य शहरों में भी ऐसी सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में श्रीनगर, पटना, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में वॉटर मेट्रो शुरू की जाएगी। दूसरे चरण में असम के तेजपुर और डिब्रूगढ़ सहित अन्य शहरों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। वॉटर मेट्रो को मुंबई की यातायात समस्या, लोकल ट्रेनों की भीड़ और बढ़ते शहरी दबाव के बीच एक वैकल्पिक, आधुनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।

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