मेयर रितु तावड़े (सोर्स: सोशल मीडिया ) 
मुंबई

Mumbai News: पानी की कमी से निपटने की तैयारी, महापौर ने पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के दिए निर्देश

Mumbai में बढ़ती गर्मी और जल संकट के बीच BMC ने पुराने कुओं और तालाबों को फिर से सक्रिय करने का फैसला किया है। महापौर ने जल प्रबंधन को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं।

अपूर्वा नायक

Mumbai Water Crisis BMC: मुंबई में बढ़ती गर्मी के साथ ही लगातार पानी की मांग बढ़ती जा रही है। जलसंकट को देखते हुए अब बीएमसी को महानगर के पुराने कुओं और तालाबों की याद आने लगी है।

पानी सप्लाई को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने पुराने कुओं और तालाबों का सही प्रबंधन कर मुंबई वासियों को बिना रुकावट पानी सप्लाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

पानी सप्लाई की समस्या बढ़ रही है, इसलिए महापौर ने मनपा के जल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तार से चर्चा की। शहर के कई कुएं और तालाब लुप्त हो चुके हैं। ऐसे में महापौर ने पारंपरिक पानी के स्त्रोत को फिर से जिंदा करने, पानी के दूसरे सोर्स खोजने पर बल दिया है।

उन्होंने मुंबई के सभी पब्लिक, सरकारी और प्राइवेट कुओं और बोरहोल की अपडेटेड जानकारी तुरंत इकट्ठा करने का निर्देश दिया है। साल 2009 में कम बारिश की वजह से बीएमसी ने कुओं की मरम्मत की थी और लोगों को पानी उपलब्ध कराया था। उसी आधार पर सभी कुओं की जांच की जानी चाहिए।

पानी प्रबंधन जरूरी, पेयजल की बने योजना

जिन कुओं को तुरंत चालू किया जा सकता है, उन्हें प्राथमिकता के साथ शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। महापौर ने कहा कि मुंबई में बढ़ती आबादी की वजह से पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए पानी प्रबंधन जरूरी हो गया है।

कुओ से कितना सुरक्षित पेयजल इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी जांच की जाए और उसी के हिसाब से योजना बनाई जाए। इन कुओं का इस्तेमाल सिर्फ बागवानी या सफाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

सोसाइटियां और इंडस्ट्री सेक्टर करे सहयोग

महापौर रितु तावड़े ने कहा कि मुंबई में पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए प्राइवेट हाउसिंग सोसाइटियों और इंडस्ट्री सेक्टर को सहयोग करना चाहिए। सोसाइटियों को अपने इलाके में कुओं और उनकी पाइपों का रेगुलर रखरखाव, मरम्मत और सफाई करनी चाहिए। वॉटर प्यूरिफिकेशन सिस्टम लगाने चाहिए, ग्राउंडवाटर नियमों के मुताबिक लिमिट के अंदर पानी निकाला जाए, भविष्य में पानी की कमी से बचने के लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर जोर दिया जाना चाहिए।

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