ट्रेन नंबर 16332 के महिला आरक्षित डिब्बे में पुरुषों के सफर का आरोप।
महिलाओं के आपत्ति जताने पर कथित तौर पर दिया गया उद्धत जवाब।
घटना के बाद महिला यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल।
रेलवे प्रशासन और आरपीएफ की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं।
महिला डिब्बों में निगरानी और जांच बढ़ाने की मांग।
Mumbai Train Ladies Coach Security: मुंबई, उपनगरीय लोकल ट्रेनों से लेकर लंबी दूरी की ट्रेनों तक महिला यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा लगातार चर्चा में रहता है। इसी बीच ट्रेन नंबर 16332 तिरुवनंतपुरम सेंट्रल-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस के महिला आरक्षित डिब्बे में पुरुष यात्रियों के सफर करने का मामला सामने आया है।
मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेन के महिला आरक्षित डिब्बे में कुछ पुरुष यात्री बैठे हुए थे। महिला यात्रियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए उन्हें याद दिलाया कि यह डिब्बा महिलाओं के लिए आरक्षित है। उन्होंने पुरुष यात्रियों से डिब्बे से बाहर जाने को कहा।
आरोप है कि महिलाओं की आपत्ति पर पुरुष यात्रियों ने उलटे उद्धत अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा, ‘हम पहले से ही इसी डिब्बे में सफर कर रहे हैं।’ इस जवाब से महिला यात्रियों में नाराजगी फैल गई।
महिला आरक्षित डिब्बे में पुरुषों की मौजूदगी और आपत्ति जताने पर कथित प्रतिक्रिया ने यात्रियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रेलवे में महिला यात्रियों के लिए आरक्षित डिब्बों की व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक सफर उपलब्ध कराना है। ऐसे डिब्बों में अनधिकृत रूप से पुरुष यात्रियों के सफर करने की शिकायतें नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
खासकर लंबी दूरी की ट्रेन में इस तरह की घटना को गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है, ताकि महिला यात्रियों को असहज स्थिति का सामना न करना पड़े।
इस मामले में रेलवे प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) या टिकट जांच दल की ओर से किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यात्रियों ने महिला आरक्षित डिब्बों में नियमित जांच और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
अब यह देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इस तरह की शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और महिला यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को किस तरह मजबूत किया जाता है।