Mumbai-Pune Missing Link: क्या मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बन रही नई सुरंग गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराएगी? यह सवाल इन दिनों महाराष्ट्र के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। खंडाला घाट के उस चुनौतीपूर्ण रास्ते को बायपास करने के लिए तैयार किया जा रहा मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट अपनी इंजीनियरिंग और विशालकाय बनावट के कारण दुनिया भर का ध्यान आकर्षित कर रहा है। 1 मई 2026 को खुलने वाला यह मार्ग न केवल यात्रियों का समय बचाएगा, बल्कि भारत की तकनीकी शक्ति का लोहा भी मनवाएगा।
माना जाता है की बोरघाट में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम के कारण प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपये का ईंधन व्यर्थ जल जाता है। यह नुकसान सालाना या मासिक नहीं, बल्कि हर एक दिन का है। पिछले दो दशकों से महाराष्ट्र इस आर्थिक चोट को सहता आ रहा है। जब गाड़ियां घंटों जाम में रेंगती हैं, तो न केवल ईंधन की बर्बादी होती है, बल्कि माल ढुलाई में देरी, लॉजिस्टिक्स पेनल्टी और दुर्घटनाओं के कारण करोड़ों का अतिरिक्त बोझ अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट इसी गहरे जख्म को भरने की एक सफल कोशिश है।
मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट केवल चौड़ाई में ही नहीं, बल्कि लंबाई और इंजीनियरिंग की श्रेणी में भी एशिया के दिग्गजों को टक्कर दे रहा है। जहाँ भारत में ज़ोजिला सुरंग जो अभी निर्माणाधीन हैं(14.2 किमी) ,और चेनानी-नाशरी सुरंग (9.28 किमी) अपनी लंबाई के लिए जानी जाती हैं, वहीं मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की यह सुरंग अपनी 23.5 से 24 मीटर की चौड़ाई के साथ एशिया की सबसे ब्रॉड सुरंगों में शीर्ष पर है। चीन की जिनान हुआंगगांग रोड टनल (2025) जैसी आधुनिक सुरंगों के साथ इसकी तुलना की जा रही है, जो इसे वैश्विक पटल पर एक अनूठा प्रोजेक्ट बनाती है। यह न केवल लंबाई बल्कि अपनी 8-लेन की क्षमता के साथ ब्रॉडेस्ट टनल की श्रेणी में अपना लोहा मनवा सकती है।
अक्सर देखा गया है कि छुट्टियों के दौरान बोरघाट में 32 घंटे तक के लंबे जाम लग जाते हैं। ढलान और चढाव पर रेंगते ट्रैफिक के कारण गाड़ियों के इंजन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे क्लच प्लेट जलने और इंजन ओवरहीट होने की घटनाएं आम हो जाती हैं। मिसिंग लिंक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह इन तीखे मोड़ों को खत्म कर दे, जिससे वाहनों की उम्र बढ़ेगी और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।