दही हंडी और गणेश उत्सव की तैयारी सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

मुंबईकर ध्यान दें! 27 सितंबर तक भूलकर भी साथ न रखें ये सामान, वरना पुलिस करेगी सीधी कार्रवाई

Mumbai Police Bans Carrying Weapons: त्योहारों के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है। 27 सितंबर तक हथियार, विस्फोटक और अन्य खतरनाक चीजें साथ लेकर चलने पर रोक लगा दी है।

वेदांत जोशी

Mumbai Police Decision To Maintain Peace And Security: मुंबई में आगामी त्योहारों को मद्देनजर रखते हुए पुलिस ने सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए हथियारों और अन्य खतरनाक वस्तुओं को साथ लेकर चलने पर रोक लगा दी है। मुंबई पुलिस का यह आदेश 29 अगस्त से 27 सितंबर तक प्रभावी रहेगा। एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी के मुताबिक, पुलिस उपायुक्त अकबर पठान ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत यह आदेश जारी किया है। इसके तहत तलवार, भाला, चाकू, छड़ी, लाठी और ऐसी अन्य वस्तुएं साथ लेकर चलने पर प्रतिबंध रहेगा, जिनसे किसी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी से अनुमति मिलने पर इन वस्तुओं को साथ रखने की छूट दी जा सकेगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।

त्योहारों के दौरान सुरक्षा पर जोर

मुंबई में पांच सितंबर को दही हांडी उत्सव मनाया जाएगा और 10 दिन तक चलने वाला गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा। इन बड़े आयोजनों के दौरान शहर में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से ये कदम उठाए हैं।

आदेश के तहत खतरनाक रसायनों और विस्फोटक पदार्थों को रखने पर भी रोक लगाई गई है। इसके अलावा पत्थर, मिसाइल या मिसाइल दागने वाले उपकरणों के भंडारण पर भी प्रतिबंध रहेगा।

मुंबई पुलिस के आदेश में सार्वजनिक रूप से व्यक्तियों, शवों, आकृतियों, चित्रों या पुतलों के प्रदर्शन को लेकर भी कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं। ऐसे सार्वजनिक बयान, गीत या संगीत भी प्रतिबंधित किए गए हैं, जिन्हें किसी पुलिस अधिकारी की राय में शालीनता या नैतिकता के खिलाफ माना जाए और जिनसे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

आदेश खत्म होने के बाद भी कार्रवाई संभव

अधिकारी ने बताया कि 27 सितंबर को प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बावजूद इस दौरान हुए उल्लंघनों की जांच या कानूनी कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी। यानी आदेश की अवधि में नियम तोड़ने के मामलों में बाद में भी जांच जारी रह सकती है और दोषी पाए जाने पर जुर्माना, जब्ती या कैद जैसी कार्रवाई की जा सकती है। ये फैसला सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।

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