ईडी ने वकील राशेश उपाध्याय को गिरफ्तार किया।
डिजिटल अरेस्ट में दंपति से ₹2.6 करोड़ की ठगी।
20 राज्यों में 300 से अधिक पीड़ित, ₹28,000 करोड़ के ट्रांजैक्शन का खुलासा।
Maharashtra ED Action: देशव्यापी साइबर ठगी नेटवर्क की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वकील राशेश भरत कुमार उपाध्याय को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता था और फ्रीज किए गए बैंक खातों को रिश्वत के जरिए दोबारा चालू करवाने में मदद करता था। उत्तर गोवा की विशेष पीएमएलए अदालत ने उसे 29 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में यह सातवीं बड़ी गिरफ्तारी बताई गई है।
ईडी ने गोवा पुलिस की ओर से डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के संबंध में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी बिना वापसी की टिकट बुकिंग के दिल्ली जाने की कोशिश कर रहा था। उसे मुंबई कस्टम्स और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की मदद से पकड़ा गया।
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, साइबर ठगों ने खुद को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर एक दंपति को निशाना बनाया। उन्हें वीडियो निगरानी में रखने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कथित फर्जी आदेश का इस्तेमाल किया गया और करीब 2.6 करोड़ रुपये एक तथाकथित गुप्त निगरानी खाते में ट्रांसफर कराए गए।
ईडी की जांच के अनुसार, ठगी की रकम 400 से अधिक म्यूल खातों के जरिए फॉरेक्स कंपनियों के नेटवर्क तक पहुंचाई गई। म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या छिपाने के लिए किया जाता है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों में करीब 28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन और लगभग 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। इन खातों के संबंध में 20 राज्यों में 300 से अधिक पीड़ितों की शिकायतें दर्ज होने की बात कही गई है।
ईडी का आरोप है कि गिरफ्तार वकील ने एजेंसियों द्वारा फ्रीज किए गए खातों को दोबारा चालू करवाने के लिए संदिग्ध अधिकारियों को नकद रिश्वत देने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। जांच में ऐसे करीब 100 खातों को अनफ्रीज करवाने और एक मामले में 60 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, आरोपी ने अपनी पेशेवर हैसियत का कथित दुरुपयोग करते हुए बैंक खातों को दोबारा चालू करवाने और अपराध से प्राप्त धन को बचाने में मदद की। जांच एजेंसी का दावा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने व्हाट्सऐप संदेश डिलीट किए और अपने मोबाइल नंबर बंद कर दिए थे।
इस मामले में छह अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पहले हो चुकी है। अब जांच एजेंसी कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और भ्रष्टाचार में शामिल होने के संदेह वाले अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।