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नागपुर कृषि विभाग ने कम बारिश के बीच पानी का सोच-समझकर उपयोग करने की अपील की है।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी डॉ. अर्चना कड़ ने जल भंडार और मिट्टी के प्रकार के अनुसार बुआई की सलाह दी।
चना, करडी, अलसी, तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का और सूरजमुखी जैसी फसलों पर जोर दिया गया है।
गेहूं जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलों का रकबा जल उपलब्धता के अनुसार तय करने को कहा गया है।
Nagpur Agriculture Department: नागपुर शहर में कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव के चालते उपजी सूखाग्रस्त स्थिति को देखते हुए नागपुर कृषि विभाग ने किसानों से रखी सीजन में पानी का सोच-समझकर और कार्यकुशलता से उपयोग करने की अपील की है।
नागपुर जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी डॉ. अर्चना कड़ ने किसानों से आग्रह किया है कि वे उपलब्ध जल भंडार, मिट्टी के प्रकार और स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही फसलों की बुआई करें।
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि कम पानी में पकने वाली फसलों जैसे चना, करडी, अलसी, तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का और सुरजमुखी को प्राथमिकता दें। पौष्टिक चिया और पशुओं के लिए चारा फसलों का भी बेहत्तर नियोजन करें।
गेहूं जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलों का रकबा उपलब्ध जलस्रोत के हिसाब से ही तय करें।
संतरा बागवानीः संतरे के बगीचों में नमी बनाए रखने के लिए आच्छादन का उपयोग करें।
सिंचाई और जल प्रबंधन के नियम बुआई से पहले खेत की नमी, कुओं और बोरवेल के जलस्तर का सही आकलन
करें। पानी को निश्चित उपलब्धता न होने पर ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों को बड़े पैमाने पर लगाने से बचें। ड्रिप और संप्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का अधिकतम उपयोग करें। खेत में नमी बनाए रखने के लिए समय पर निराई-गुड़ाई और अंतर-मशक्कत करें।
विदर्भ में चान की कटाई के बाद खाली खेतों में उपलब्ध नमी का उपयोग कर रखी ज्यार उगाना एक बेहतरीन विकल्प है। इससे खाद्यान्न के साथ-साथ मवेशियों के लिए पौष्टिक सुखा चास भी मिलता है।
किसानों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे कृषि विशेषज्ञों और जिला प्रशासन के इन दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करें। इस कठिन समय में जल प्रबंधन की सूझबूझ और वैज्ञानिक तौर-तरीकों को अपनाकर ही कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सकता है और संभावित आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।