मुंबई पुलिस का डिटेंशन सेंटर (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

मुंबई में विदेशी नागरिकों के लिए डिटेंशन सेंटर अब भी बंद, डिपोर्टेशन प्रक्रिया में हो रही देरी

Illegal Foreigners Detention Center In Mumbai: मुंबई में अवैध विदेशी नागरिकों की बढ़ती संख्या और लंबी डिपोर्टेशन प्रक्रिया के बीच डिटेंशन सेंटर की जरूरत तेज हो गई है।

अपूर्वा नायक

Mumbai Illegal Foreigners Detention Issue: मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में घुसपैठ (खासकर बांग्लादेशी और अन्य विदेशी नागरिकों की) कानून-व्यवस्था की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है।

मुंबई पुलिस इन घुसपैठियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। लेकिन जब तक उनके स्वदेश वापसी की व्यवस्था नहीं हो जाती, उन्हें सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बनी रहती है।

चूंकि वे न तो अपराधी हैं और न ही किसी अपराध में आरोपी, इसलिए इन्हें पुलिस लॉकअप या न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। एक बार जब इन्हें अदालत के सामने पेश किया जाता है, तो निर्वासन (डिपोर्टेशन) की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जिसमें अक्सर महीनों और कुछ मामलों में वर्षों लग जाते हैं।

कई करते हैं भागने की कोशिश

  • इस दौरान इन्हें इस निर्देश के साथ रिहा कर दिया जाता है कि, वे पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकार या शहर से बाहर न जाएँ। हालांकि, यह व्यवस्था भरोसेमंद नहीं है। कई लोग मौका मिलते ही भागने की कोशिश करते हैं। इसीलिए इनके लिए डिटेंशन सेंटर (नजरबंदी केंद्र) की व्यवस्था बहुत जरूरी है। लेकिन मुंबई पुलिस के पास ऐसा कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है।
  • हालांकि परेल स्थित भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन के पीछे एक डिटेंशन सेंटर का निर्माण किया गया है। लेकिन उसे अभी तक शुरू नहीं किया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि, हिरासत में लिए गए विदेशी नागरिकों को रखने की जिम्मेदारी संबंधित पुलिस थानों के आतंकवाद-विरोधी प्रकोष्ठ (एटीसी) पर है।
  • लेकिन कानून के अनुसार, केंद्र को पुलिस के बजाय सामाजिक कल्याण या न्याय विभाग के कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाना चाहिए। इतने अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता देरी का प्रमुख कारण है। आवश्यकता होने के बावजूद, हिरासत केंद्र कब चालू होगा, इस बारे में अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है।

दमनकारी कार्रवाई अब की जा रही है तेज

मुंबई पुलिस के आंकड़ों से पता चलता है कि अवैध विदेशी नागरिकों, खासकर बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2025 में मुंबई से लगभग 1000 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित किया गया। वर्ष 2024 में लगभग 300 को हिरासत में लिया गया, जिनमें से करीब 160 को निर्वासित किया गया। वर्ष 2023 में यह संख्या दो अंकों में थी, जिससे हाल के प्रवर्तन अभियानों में आई तीव्र वृद्धि स्पष्ट दिखती है।

केंद्र पर नहीं की जाएगी जेल के कर्मचारियों की तैनाती

डिटेशन सेंटर जेल नहीं है और वहीं जेल कर्मचारियों को तैनात नहीं किया जाएगा, केवल उन्हीं लोगों को हिरासत में लिया जाएगा जो अपने वीजा की अवधि से अधिक समय तक भारत में रुके हुए पाए जाएँगे। उन्हें तब तक वहीं रखा जाएगा, जब तक उल्लंघनकर्ता को उसके देश वापस नहीं भेज दिया जाता। अधिकारियों ने संबंधित देश के वाणिज्य दूतावास और बंदी के बीच निजी बैठक के लिए एक अलग कमरा आवंटित करने का भी निर्णय लिया है।

एमएसएफ के हाथों में डिटेंशन सेंटर की सुरक्षा

सूत्रों की माने तो डिटेंशन सेंटर को महाराष्ट्र सुरक्षा बल (एमएसएफ) द्वारा सिक्योरिटी प्रदान की जाएगी। डिटेंशन सेंटर की निगरानी पुलिस उपायुक्त (विशेष शाखा II) द्वारा की जाएगी, क्योंकि यह विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों से संबंधित मुद्दों से भी निपटता है। डीसीपी का कार्यालय संबंधित देशों के वाणिज्य दूतावास के संपर्क में रहेगा, सभी औपचारिकताएं पूरी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि बंदियों को उनके देशों में वापस भेज दिया जाए।

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