अमित ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

मुंबई की पहली 'म्यूजिकल रोड' पर सियासी बवाल! अमित ठाकरे बोले- 'जय हो' नहीं, 'गरजा महाराष्ट्र माझा' बजना चाहिए

Mumbai Musical Road: मुंबई कोस्टल रोड पर भारत की पहली 'संगीतमय सड़क' शुरू हुई है, जिसमें 'जय हो' की धुन बजती है। मनसे नेता अमित ठाकरे ने मराठी अस्मिता का मुद्दा उठाते हुए धुन बदलने की मांग की है।

आकाश मसने

Amit Thackeray Opposes Jai Ho Tune: मायानगरी मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नया और अनोखा अध्याय जुड़ गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने कोस्टल रोड पर देश की पहली 'म्यूजिकल रोड' (Melody Road) का अनावरण किया है। हालांकि, उद्घाटन के साथ ही यह सड़क अपनी धुन को लेकर राजनीतिक चर्चाओं और विवादों के केंद्र में आ गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अमित ठाकरे ने इस परियोजना में बजने वाली धुन पर कड़ी आपत्ति जताई है।

क्या है 'म्यूजिकल रोड' और कैसे बजती है धुन?

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को इस अनूठी सड़क का उद्घाटन किया। कोस्टल रोड के करीब 500 मीटर के हिस्से पर विशेष प्रकार के खांचे (grooves) बनाए गए हैं। जब कोई वाहन इस पैच पर 70 से 80 किमी प्रति घंटे की निर्धारित गति से चलता है, तो टायरों और सड़क के बीच होने वाले घर्षण से स्वर निकलते हैं। वर्तमान में, यहां से गुजरने पर ऑस्कर विजेता फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के प्रसिद्ध गीत 'जय हो' की धुन सुनाई देती है।

अमित ठाकरे ने क्यों जताया विरोध?

मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए मराठी अस्मिता का सवाल उठाया। उन्होंने कोस्टल रोड को मुंबई की एक महत्वाकांक्षी परियोजना तो बताया, लेकिन धुन के चुनाव पर सवाल खड़े किए।

अमित ठाकरे ने पोस्ट में लिखा, "अगर इस सड़क पर कोई मराठी धुन बजती, तो यह एक अलग अनुभव और गर्व का क्षण होता। लेकिन हमने एक बार फिर अपनी पहचान खो दी है।" उन्होंने सुझाव दिया कि 'जय हो' के बजाय यदि महाराष्ट्र का राज्य गीत 'गरजा महाराष्ट्र माझा' या महान गायिका लता मंगेशकर के किसी मराठी गीत की धुन चुनी जाती, तो यह राज्य की संस्कृति का वास्तविक सम्मान होता।

परियोजना का विस्तार और तकनीक

फिलहाल यह प्रयोग केवल 500 मीटर के हिस्से पर किया गया है, लेकिन सरकार की योजना इसे अन्य प्रमुख सड़कों पर भी विस्तारित करने की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक न केवल मनोरंजन के लिए है, बल्कि ड्राइवरों को एक निश्चित गति सीमा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित भी करती है, क्योंकि धुन तभी स्पष्ट सुनाई देती है जब गाड़ी सही रफ्तार पर हो।

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