भायखला जेल (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

कैदियों के खाने पर मंडरा रहा खतरा, मुंबई की जेलों में गहराया LPG संकट, क्या अब चूल्हे पर बनेगी रोटियां?

Mumbai LPG Crisis: ईरान-इजराइल युद्ध के चलते मुंबई की जेलों में रसोई गैस की भारी किल्लत हो गई है। भायखला जेल में 800 कैदियों के भोजन के लिए अब वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं।

आकाश मसने

Mumbai Byculla Jail LPG Crisis News: मुंबई में वर्तमान समय में रसोई गैस (LPG) का संकट चल रहा है, जो मुख्य रूप से ईरान-इजरायल संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी समस्याओं के कारण, वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान से उत्पन्न हुआ है। इसका असर अब संस्थागत रसोइयों पर भी दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में मुंबई स्थित भायखला जिला कारागृह (भायखला जेल) में गैस सिलेंडरों की कमी से प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी होती दिख रही है। 262 महिला और 200 पुरुष कैदियों की क्षमता वाले भायखला जेल में करीब 800 से अधिक कैदी हैं, जिनके लिए प्रतिदिन भोजन तैयार किया जाता है और इसके लिए बड़ी मात्रा में रसोई गैस की आवश्यकता होती है।

हालांकि, जेल प्रशासन की सतर्कता की वजह से संकट आने से पहले ही इसके समाधान की तैयारी शुरू कर दी गई है और करीब तीन दिन का रसोई गैस का स्टॉक जमा कर लिया गया है। बता दें कि राज्य की जेलों (कारागृह) में इसका असर पड़ेगा, हालांकि जेलें आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आती हैं।

कैदियों के लिए रोज 2 हजार से अधिक रोटी सेंकी जाती है

भायखला जिला कारागृह प्रशासन के अनुसार यहां करीब 500 महिला और 300 पुरुष कैदी है। इनके लिए सुबह के चाय-नाश्ता के साथ ही दोपहर और रात का पूरा खाना पकाया जाता है। दोपहर और रात के खाने के लिए जहां चावल-दाल, रोटी-सब्जी समेत पूरा खाना तैयार किया जाता तो हर दिन 2 बार चाय और दूध भी गर्म होता है। इतने कैदियों के लिए एक दिन में करीब 2 हजार से अधिक रोटी सेंकी जाती है। एक साथ इतने लोगों के लिए खाना तैयार करने में प्रतिदिन 7-8 रसोई गैस सिलेंडर की जरूरत होती है।

अन्य जेलों में किल्लत शुरू

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कई जेलों में रसोई गैस की कमी शुरू हो चुकी है, जिसमें से एक नागपुर का मध्यवर्ती कारागृह भी है। इसके बाद जेल प्रशासन ने गैस की तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित गैस वितरक एजेंसी और अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रतिदिन रसोई गैस सिलेंडर आपूर्ति करने हेतु पत्राचार शुरू कर दिया है।

कैदियों के मुकाबले, सामान्य व्यक्तिों के पास कई विकल्प

महाराष्ट्र सरकार और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रक्षा क्षेत्र, रेलवे, हवाई यातायात, पुलिस और जेलों को एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता दी जा रही है। जेल के बाहर के लोग रसोई गैस की किल्लत से निपटने के लिए केरोसिन, इंडक्शन चूल्हा, होटल या स्ट्रीट फूड (वड़ा पाव, सैंडविच आदि), स्नैक्स जैसे कई विकल्प इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन जेल के कैदियों के पास जेल की रसोई के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वे बाहर का खाना या घर से लाया कुछ भी नहीं खा सकते है, यह उनकी मजबूरी है और अगर संकट लंबा चला तो समस्या बढ़ सकती है।

कैदियों को प्रतिदिन मिलने वाला कच्चा अनाज (जो पका कर देते हैं)

खाद्य सामग्री मात्रा
दाल 150 ग्राम
चावल 120 ग्राम
चपाती 150 ग्राम
सब्जी 300 ग्राम
दूध 200 मिलीलीटर

इसके अलावा नाश्ते में चाय, पोहा, मीठा शीरा या अन्य दिया जाता है।

हमारा प्रयास कैदियों को मिले समय पर भोजन

भायखला जिला कारागृह अधीक्षक अशोक कारकर ने बताया कि इस संकट से निपटने के लिए जेल में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। एक वर्ष से बंद पड़ी पुरानी कैंटीन के रिनोवेशन का काम शुरू कर दिया गया है। ताकि अगर संकट और बढ़ा तो लकड़ी के चूल्हे पर चावल-दाल तो पकाया जा सके, इसके लिए विकल्प के लिए लकड़ियों की व्यवस्था की गई है। हमारा प्रयास है कि कैदियों के भोजन में किसी प्रकार की कमी या देरी न हो। इसके लिए हमारा स्टाफ पूरी मेहनत कर रहा है।

- नवभारत लाइव के लिए मुंबई से तारिक खान की रिपोर्ट

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