प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

मुंबई-अहमदाबाद हाईवे बना ‘डेथ ट्रैप’, 69 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं सुधरी सुरक्षा

Mumbai Ahemdabad Highway Accidents News: मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर बढ़ते हादसों ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 69 करोड़ खर्च के बावजूद तेज रफ्तार और शॉर्टकट से जान का खतरा बना हुआ है।

अपूर्वा नायक

Mumbai Ahemdabad Highway Accidents: मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग अब मुसाफिरों के लिए 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) बनता जा रहा है। विडंबना यह है कि प्रशासन ने सुरक्षा के नाम पर 69 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन धरातल पर नतीजे शून्य नजर आ रहे हैं।

राहगीरों का 'शॉर्टकट' के प्रति मोह और वाहन चालकों की रफ्तार का जुनून मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रहा है। हाल ही में चिंचोटी के पास हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे ने एनएचएआई (NHAI) के सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है।

रफ्तार का कहरः हायाबुसा ने ली 3 की जान

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिंचोटी इलाके में साधना होटल के पास एक 19 वर्षीय युवक, ईश्वर साव, सड़क पार कर रहा था। तभी तेज रफ्तार से आई एक 'हायाबुसा' बाइक ने उसे जोरदार टक्कर मारी टक्कर इतनी भीषण थी कि ईश्वर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अनियंत्रित बाइक सड़क पर 100 मीटर तक घिसटती चली गई, जिसके कारण बाइक सवार शाहरुख और अर्जुन की भी दर्दनाक मौत हो गई। इस मंजर ने हाईवे पर सुरक्षा इंतजामों पर सवालिया निशान लगा दिया है।

चालकों की लापरवाही पड़ रही भारी

  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वर्सोवा ब्रिज से पालघर तक सुरक्षा पुख्ता करने के लिए 69 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इसके तहत कई कार्य किये गये।हॉटस्पॉट पर निर्माण विरार, नालासोपारा, शिवेचापाड़ा और चिंचोटी जैसे दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास।
  • लोहे की घेराबंदी : मवेशियों और पैदल यात्रियों को रोकने के लिए हाईवे के बीच और किनारों पर लोहे की मजबूत जालियां लगाई गई।
  • स्थानीय लोग चंद मिनट बचाने के लिए इन लोहे की जालियों को काटकर या फांदकर सड़क पार कर रहे हैं। यही 'शॉर्टकट' उनके जीवन का 'डेड एंड' साबित हो रहा है।

हमने अपना उत्तरदायित्व निभाते हुए जालियां और फुटओवर ब्रिज बनवा दिए है। अब सड़क पर अवैध रूप से खड़े होने वाले वाहनों और अतिक्रमण पर कार्रवाई करना ट्रैफिक पुलिस का काम है, हमने उन्हें इस संबंध में लिखित सूचना दे दी है। - सुहास, सचित, प्रोजेक्ट मैनेजर, NHAI

अवैध पार्किंग भी बन रही वजह

हाईवे पर केवल तेज रफ्तार ही समस्या नहीं है, बल्कि अवैध पार्किंग भी एक बड़ा 'कोद' बनकर उभरी है। भारी ट्रक और कंटेनर चालक सड़क के किनारों को अपना निजी पार्किंग स्टैंड बना लेते हैं। खड़े वाहनों के कारण सड़क संकरी हो जाती है। पीछे से आने वाले वाहनों को सड़क पार करने वाले लोग या अन्य अवरोध दिखाई नहीं देते, जिससे टक्कर होना लाजमी है।

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