MSRTC Salary and PF Dues: महाराष्ट्र की लाइफलाइन कही जाने वाली एसटी महामंडल एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट में घिरता नजर आ रहा है। चालू महीने में महामंडल पर करीब 1,071 करोड़ रुपये की देनदारी होने की जानकारी सामने आई है। इस बीच राज्य के वित्त विभाग ने एसटी के आर्थिक लेन-देन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कई मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने बुधवार को यह जानकारी दी। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से एसटी महामंडल को पहले दिए गए 200 करोड़ रुपये के ब्याजमुक्त कर्ज की अब तक वापसी क्यों नहीं हुई, इस पर भी वित्त विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा है।
बरगे के अनुसार, पिछले दो-तीन वर्षों से एसटी महामंडल की 4,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की वैधानिक देनदारियां लंबित हैं। इसमें कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी की करीब 3,000 करोड़ रुपये की राशि शामिल होने का दावा किया गया है।
इसके अलावा कर्मचारियों की वेतनवृद्धि के अंतर की 480 करोड़ 53 लाख रुपये की राशि सरकार ने मंजूर कर दी है, लेकिन यह रकम अभी तक एसटी महामंडल को नहीं मिली है। डीजल और स्पेयर पार्ट्स के लिए भी करीब 100 करोड़ रुपये बकाया होने की बात बरगे ने कही है।
एसटी कर्मचारियों के पूरे वेतन के लिए हर महीने करीब 540 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। लेकिन पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल करीब 330 करोड़ रुपये का ही नेट वेतन दिया जा रहा है।
बरगे का कहना है कि कर्मचारियों की बकाया राशि लगातार बढ़ रही है। अगर यही स्थिति बनी रही तो अगले महीने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने में भी मुश्किलें आ सकती हैं।
वित्त विभाग ने एसटी महामंडल को दिए गए 200 करोड़ रुपये के ब्याजमुक्त कर्ज की राशि अब तक सरकार को वापस क्यों नहीं की गई, इसका स्पष्ट और विस्तृत जवाब मांगा है।
इसके साथ ही, यदि विशेष लेखापरीक्षण (Special Audit) की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है तो उसे भी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित ऑडिट रिपोर्ट और प्रतिपूर्ति से जुड़ी पूरी जानकारी अगले प्रस्ताव के साथ प्रस्तुत करने को कहा गया है।
वित्त विभाग ने एसटी के आर्थिक आंकड़ों से जुड़े डैशबोर्ड को भी अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। पिछली अवधि की रकम इसमें शामिल नहीं होने की बात सामने आने के बाद वित्त विभाग को आवश्यक लॉगिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
एक तरफ एसटी का संचित घाटा लगातार बढ़ रहा है और दूसरी तरफ कर्मचारियों की देनदारी, PF-ग्रेच्युटी, डीजल, स्पेयर पार्ट्स और अन्य भुगतान लंबित हैं। ऐसे में महामंडल के रोजमर्रा के आर्थिक कामकाज पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।
श्रीरंग बरगे ने सरकार से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि एक तरफ घाटा बढ़ रहा है और दूसरी तरफ देनदारियां जमा होती जा रही हैं। ऐसे में एसटी को इस आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
अब सवाल यही है कि महाराष्ट्र की करोड़ों यात्रियों की जीवनरेखा कही जाने वाली एसटी महामंडल को इस बढ़ते आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है?