NCP शरदचंद्र पवार के विधायक रोहित पवार ने तुकाराम मुंढे को सबूत सौंपे।
फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले की व्यापक जांच की मांग की है।
क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक करने की अपील की।
Rohit Pawar Submits Evidence To Tukaram Mundhe: NCP शरदचंद्र पवार के विधायक रोहित पवार ने MPSC पेपर लीक मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के सचिव तुकाराम मुंढे को नए सबूत सौंपकर मामले की व्यापक जांच और क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में हुई धांधली को लेकर उन्होंने अभ्यर्थियों के साथ मिलकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की है।
MPSC ने 22 मार्च 2026 को फूड एंड ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा आयोजित की थी। अभ्यर्थियों की शिकायतों और डिजिटल सबूतों के बाद 26 अगस्त 2026 को आयोग ने पेपर लीक होने की बात स्वीकार की। इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही है और अब तक 10-11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
सत्यापित जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी ऋतुजा पाटील, साजिद संदे, विजय किंगार, MPSC के अधिकारी अभिजीत लेंडवे, विश्वेश्वर नकाते, गोपाल मराठे, रोहित कोलटक्के और दलाल प्रवीण पाटील, संदीप खलाटे, भैरवनाथ कदम शामिल हैं।
रोहित पवार का कहना है कि कुछ गिरफ्तारियों के बावजूद पेपर लीक का दायरा बेहद बड़ा है और इसमें आयोग के भीतर व बाहर कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों के साथ मिलकर न्यायिक आयोग के सचिव तुकाराम मुंढे को सबूत सौंपकर गहन जांच की मांग की।
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कहने के बावजूद क्राइम ब्रांच ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है, जिसे अब न्यायिक आयोग द्वारा मंगवाकर सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
रोहित पवार ने MPSC की OMR शीट से पांचवां विकल्प हटाने के फैसले पर भी सवाल खड़े किए हैं। 24 दिसंबर 2025 के परिपत्रक के बाद 5 मार्च 2026 को छात्रों को विश्वास में लिए बिना पांचवां विकल्प लागू करने का निर्णय स्थगित कर दिया गया। इसके अलावा, जुलाई 2023 से कुल हल किए गए प्रश्नों की संख्या लिखने का प्रावधान भी हटा दिया गया था।
रोहित पवार का आरोप है कि इन बदलावों के कारण परीक्षा में गड़बड़ी करने वाला गिरोह सक्रिय हुआ। उन्होंने मांग की कि पांचवां विकल्प किस दबाव में हटाया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
स्पर्धा परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थी न्याय की आस में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस जांच का दायरा बढ़ेगा और क्या क्राइम ब्रांच की शुरुआती रिपोर्ट सार्वजनिक होगी?