Mpower Mental Health Survey Urban Youth: मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ने के बावजूद शहरों के युवा अब भी अपनी भावनात्मक परेशानियों को खुलकर साझा नहीं कर पा रहे हैं।
एमपावर के 'अनपैक योर इमोशनल बैगेज' सर्वेक्षण में सामने आया है कि 18 से 25 वर्ष की उम्र के 49.5 प्रतिशत युवा अपनी परेशानियों को छिपाकर खुद ही उनसे निपटने की कोशिश करते हैं।
वहीं, केवल 9.2 प्रतिशत युवाओं ने विशेषज्ञों से मदद लेने की बात कही। मुंबई शहर समेत देश के दस प्रमुख शहरों में किए गए इस सर्वेक्षण में युवाओं के तनाव, भावनात्मक परेशानी और उससे निपटने के तरीकों को समझने की कोशिश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार 40.9 प्रतिशत युवाओं ने माना कि वे ठीक नहीं होने के बावजूद दूसरों से कहते हैं कि वे ठीक हैं। कई युवा अपनी भावनाओं पर बात करने से बचते हैं, जबकि कुछ खुद को लगातार व्यस्त रखकर परेशानी से ध्यान हटाने की कोशिश करते हैं। युवाओं की परेशानी को लेकर समाज के रवैये पर भी सर्वेक्षण ने चिंता जताई है।
40.4% युवाओं को परेशानी के समय 'मजबूत बनने' की सलाह मिली। वहीं, केवल 13.6 प्रतिशत मुंबई युवाओं ने कहा कि किसी ने बिना किसी निर्णय के उनकी बात सुनी और उनका साथ दिया महिलाओं में भावनात्मक तनाव के कुछ रूप अधिक पाए गए।
ज्यादा सोचने वालों में 60%, खुद पर संदेह करने वालों में 56% और शरीर की बनावट को लेकर चिंता करने वालों में 69% महिलाएं थीं। दूसरी ओर, काम के तनाव से परेशान लोगों में 57% और आर्थिक असुरक्षा महसूस करने वालों में 54% पुरुष थे।
भावनात्मक परेशानी का असर रोजमर्रा के जीवन पर भी दिख रहा है। 47% युवाओं ने चिड़चिड़ेपन की शिकायत की, जबकि 36.7% को किसी काम में मन लगाने या आनंद लेने में परेशानी हुई।