Mumbai Rains Monsoon Preparations Ashwini Bhide: 13 दिन की देरी के बाद आखिरकार मुंबई में मानसून की धमाकेदार एंट्री हो गई है। मंगलवार देर रात भारी बारिश से मुंबईकरों को गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन मानसून को लेकर बीएमसी की तैयारियों के दावों की पोल खुल गई। गौरतलब है कि बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने वादा किया था कि इस वर्ष जलजमाव नहीं होगा। लेकिन मानसून की पहली बारिश के बाद उनके वादे खोखले नजर आ रहे हैं। बुधवार सुबह किंग सर्कल, हिंदमाता व मालाड सबवे में जलजमाव होने की वजह से लोगों को ऑफिस व स्कूल जाने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि इस वर्ष बीएमसी बजट में मानसून की तैयारी के लिए 1800 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही गई थी। इसके अलावा 114 करोड़ रुपये मीठी नदी व नाला सफाई के लिए दिया गया था। लगभग 1914 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी नागरिकों को जलजमाव से जूझना पड़ा, जिससे बीएमसी की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, मंगलवार रात 10 बजे से शुरू हुई तेज बारिश के कारण गांधी मार्केट, सक्कर पंचायत, दादर और सायन सर्कल सहित कई इलाकों में जलभराव हो गया।
वहीं पूर्वी उपनगर के चेंबूर, कुर्ला, मानखुर्द तथा पश्चिमी उपनगर के बोरीवली, दहिसर, कांदिवली, मालाड, गोरेगांव और अंधेरी से भी जलभराव की शिकायतें प्राप्त हुईं। मानसून अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में आगामी दिनों में यदि भारी बारिश जारी रहती है तो बीएमसी की तैयारियों की वास्तविक परीक्षा होगी। वहीं नागरिकों की अपेक्षा है कि प्रशासन दावों के बजाय जमीनी स्तर पर प्रभावी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि हर वर्ष दोहराई जाने वाली जलभराव की समस्या से मुंबई को राहत मिल सके।
शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव, धीमी यातायात व्यवस्था और नागरिकों की परेशानियों के बाद विपक्ष ने बीएमसी प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि हर वर्ष करोड़ों रुपये नाला सफाई और प्री-मानसून कार्यों पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही भारी बारिश में शहर की स्थिति बिगड़ जाती है। विपक्ष का कहना है कि जिन नालों की समय पर सफाई का दावा किया गया था, उनमें कई स्थानों पर अब भी गाद और कचरा जमा है। उनका आरोप है कि सफाई कार्यों के आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। साथ ही, नालों से निकाले गए मलबे को समय पर नहीं हटाए जाने से भी जल निकासी प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
विपक्ष बीएमसी आयुक्त के दावे से सहमत नहीं है। उसका कहना है कि यदि प्री-मानसून तैयारियां प्रभावी होती तो बारिश के शुरुआती दौर में ही सड़कों पर पानी जमा नहीं होता और लोगों को घंटों तक ट्रैफिक जाम तथा आवागमन की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता, विपक्ष ने नाला सफाई कार्यों की स्वतंत्र जांच कराने और खर्च की गई राशि का सामाजिक लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
दूसरी ओर, बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने प्रशासन का बचाव करते हुए कहा है कि मुंबई के पूरे शहर में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनती, बल्कि जलभराव कुछ चुनिंदा निचले इलाकों तक सीमित रहता है और अधिकांश स्थानों पर पानी अपेक्षाकृत कम समय में निकल जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ स्थानों के वीडियो बार-बार साझा किए जाने से पूरे शहर के डूबने की धारणा बन जाती है, जबकि वास्तविक स्थिति अलग होती है।
यह भी पढ़ें:- विकास के दावों पर आंकड़ों की चोट, फंड नहीं मिला या खर्च नहीं किया? बागी सांसदों पर MPLADS रिपोर्ट से उठे सवाल
बारिश के कारण मुंबई शहर में कुल 70 स्थानों पर शॉर्ट सर्किट की घटनाएं दर्ज की गई। इनमें 37 घटनाएं मुंबई शहर, 18 पूर्वी उपनगर और 15 पश्चिमी उपनगर में हुई। संबंधित एजेंसियों ने सभी स्थानों पर तुरंत राहत एवं मरम्मत कार्य शुरू किया।
इसके अलावा शहर और उपनगरों में कुल 113 स्थानों पर पेड़ या उनकी शाखाएं गिरने की शिकायतें मिलीं, जिन पर बीएमसी के कर्मचारी युद्धस्तर पर काम कर रहे है। वहीं सात स्थानों पर मकानों की दीवार का कुछ हिस्सा गिरने की घटनाएं भी दर्ज की गई है।
नगरसेवक शिवसेना सचिन पडवल ने कहा की सत्तारूढ़ भाजपा प्रशासन से काम कराने में पूरी तरह विफल रही है। मुंबई में पानी नहीं भरने का दावा करने वाली भाजपा और प्रशासन के सभी दावे पहली ही बारिश में खोखले साबित हो गए हैं। आज जब एक अधिकारी नाले में गिरा, तब उन्हें मुंबई वासियों की पीड़ा का एहसास हुआ है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।