Cabinet Reshuffle Nitin Gadkari Ministry Change: क्या देश की राजधानी दिल्ली की सत्ता के गलियारों में कोई बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने वाला है? क्या देश के सबसे चर्चित मंत्रालयों के नेतृत्व में कोई ऐसा बदलाव होने जा रहा है जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी? जी हां, इस समय मोदी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो चुकी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द ही एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है, जिसमें कई पुराने मंत्रियों को छुट्टी दी जा सकती है और नए व युवा चेहरों को देश की कमान संभालने का मौका मिल सकता है। इस संभावित बदलाव की सबसे बड़ी खबर यह है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का विभाग बदला जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगामी कैबिनेट विस्तार में कई चौंकाने वाले फैसले लिए जा सकते हैं। जहां शानदार परफॉर्मन्स देने वाले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को प्रमोशन मिल सकता है, वहीं नितिन गडकरी के पास मौजूद मौजूदा विभाग को बदलकर उन्हें कोई दूसरा मंत्रालय सौंपा जा सकता है।
इसके अलावा, मंत्रिमंडल में लगभग 16 से 17 नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है, जिसका सीधा मतलब यह है कि कई वर्तमान मंत्रियों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है।
आखिर इस बड़े फेरबदल की जमीन कैसे तैयार की जा रही है? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ दिनों से पार्टी के सांसदों से सीधा संवाद साधना शुरू कर दिया है। सांसदों के साथ यह खास बातचीत हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की इस विशेष चर्चा से ही यह संकेत मिल रहे हैं कि आगामी समय में कैबिनेट में किसे एंट्री मिलने जा रही है और किसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में कुल 69 मंत्री शामिल हैं, जबकि नियमों के अनुसार इस संख्या को अधिकतम 81 तक ले जाया जा सकता है। यानी वर्तमान में 12 मंत्री पद पूरी तरह से रिक्त हैं, जिन्हें इस विस्तार में भरा जा सकता है।
इसके अलावा, लगभग 14 ऐसे कैबिनेट मंत्री हैं जिनके पास एक से अधिक मंत्रालयों का कार्यभार है। उदाहरण के लिए, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनके शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रल्हाद जोशी को सौंपा गया था, जिसे अब वापस लेकर किसी नए मंत्री को दिया जा सकता है। इस फेरबदल का उद्देश्य मंत्रियों के अत्यधिक कार्यभार को कम करना और प्रशासनिक कामकाज को और तेज करना है।
बीजेपी का यह कदम केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी चुनावी रणनीति है। साल 2027 में उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जो पार्टी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हैं।
इसके ठीक बाद साल 2029 में लोकसभा चुनाव होने हैं। इसी चुनावी बिसात को मजबूत करने के लिए मोदी कैबिनेट में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों को नया और मजबूत प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
चर्चाएं हैं कि केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल का यह महाविस्तार सितंबर या अक्टूबर के महीने में हो सकता है। कुछ का तो यह भी दावा है कि जन्माष्टमी के आसपास ही इस बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। अब देखना यह होगा कि महाराष्ट्र से इस बार किस नए नेता की लॉटरी लगती है और किसे अपनी कैबिनेट सीट से हाथ धोना पड़ता है।